अगर आप खेती के साथ कोई ऐसा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं जिसमें अच्छी आय की संभावना हो तो मछली पालन एक बेहतर विकल्प हो सकता है। देश में मछली की बढ़ती मांग को देखते हुए यह व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कई लोग पूंजी की कमी के कारण इसकी शुरुआत नहीं कर पाते लेकिन अब सरकार की विभिन्न योजनाएं इस समस्या को काफी हद तक आसान बना रही हैं।
मछली पालन(Fish farming) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और विभिन्न राज्य स्तरीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना के तहत तालाब निर्माण, मछली बीज, चारा, बायोफ्लॉक सिस्टम, हैचरी और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है।
किसे कितनी मिलेगी सब्सिडी ?
योजना के नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। वहीं महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के पात्र आवेदकों को 60 से 70 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है।
उदाहरण के लिए अगर किसी परियोजना की लागत 10 लाख रुपये है तो पात्र लाभार्थी को 6 से 7 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है। इसके लिए आवेदक के पास अपनी भूमि या वैध लीज़ से संबंधित दस्तावेज होना आवश्यक है।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने जिले के मत्स्य पालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य के मत्स्य पोर्टल या प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि से जुड़े दस्तावेज और पासपोर्ट आकार का फोटो जमा करना होता है। यदि आपके पास पर्याप्त भूमि और पानी की व्यवस्था है, तो सरकारी सहायता के साथ मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।