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मौत के 4 महीने बाद दफनाए जाएंगे खामेनेई! हफ्ते भर चलेगी विदाई, 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। उनकी मौत के चार महीने से ज़्यादा समय बाद शुक्रवार को ये कार्यक्रम शुरू होंगे। उनकी मौत और दफ़नाने के बीच इतना लंबा समय बीतने पर सवाल उठ रहे हैं, और यह देरी ही हफ़्ते भर चलने वाली विदाई से पहले चर्चा का मुख्य विषय बन गई है।

लगभग 37 साल तक इस्लामिक रिपब्लिक का नेतृत्व करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट संघर्ष की शुरुआत में तेहरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान हुई थी। उनका अंतिम संस्कार शुरू में 4 मार्च को होना था, लेकिन तनाव बढ़ने के कारण इसे टाल दिया गया। बाद में ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि उन्हें मुहर्रम की शुरुआत में दफ़नाया जाएगा, लेकिन वह समय-सीमा भी निकल गई।

खामेनेई का शव कोल्ड स्टोरेज में

अंतिम संस्कार में 4 महीने की देरी ने कई लोगों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि उनके शव को कैसे सुरक्षित रखा गया होगा। आतंकवाद-विरोधी विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद उमर ने फॉक्स न्यूज़ डिजिटल को बताया, “इसके लिए लगभग निश्चित रूप से रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल किया गया होगा, न कि एम्बामिंग का, क्योंकि इस्लाम में केमिकल एम्बामिंग की मनाही है।”

मोहम्मद ने फॉक्स न्यूज़ को आगे बताया, “हो सकता है कि दिखाने के लिए ज़्यादा कुछ न बचा हो। खामेनेई की मौत बंकर-भेदी हमले में हुई थी, और उनके साथ मारे गए अन्य लोगों के शव हफ़्तों बाद मिले थे और उनकी पहचान DNA से की गई थी,यह सम्मान दिखाने से ज़्यादा ऐसा लगता है कि वे शव को सुरक्षित तो रख सकते थे, लेकिन उसे लोगों के सामने नहीं ला सकते थे।”

खामेनेई के अंतिम संस्कार में देरी के कारण

बार-बार टलने की ये घटनाएं क्षेत्र में जारी संघर्ष, ईरान और अमेरिका के बीच संवेदनशील परमाणु बातचीत और ईरान के राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के समय के साथ हुई हैं। जानकारों का मानना ​​है कि इन घटनाक्रमों ने अंतिम संस्कार के समय को न केवल धार्मिक नज़रिए से, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक नज़रिए से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

राजकीय अंतिम संस्कार 4 जुलाई को तेहरान में शुरू होगा और ईरान व इराक के कई शहरों से होते हुए 9 जुलाई को मशहद में खामेनेई को दफ़नाने के साथ संपन्न होगा। पवित्र शहर कोम में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिया इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में से एक, मशहद को उनकी अंतिम विश्राम स्थली के रूप में चुना गया है।

ईरानी अधिकारियों को उम्मीद है कि यह अंतिम संस्कार देश के इतिहास में सबसे बड़ी सार्वजनिक सभाओं में से एक होगा, और अनुमान है कि कई कार्यक्रमों में 2 करोड़ तक लोग शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों ने कार्यक्रमों के लिए व्यापक सुरक्षा और लॉजिस्टिकल इंतज़ाम किए हैं। भारतीय नेताओं को निमंत्रण

इस अंतिम संस्कार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। खबरों के अनुसार, मसूद पेज़ेश्कियान ने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था। खबर है कि भारत का प्रतिनिधित्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा, बीजेपी नेता नितिन नवीन और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी निमंत्रण भेजे गए हैं।

अपने शामिल होने की पुष्टि करते हुए, महबूबा मुफ्ती ने इस निमंत्रण को बहुत बड़ा सम्मान बताया और कहा कि वह मारे गए सर्वोच्च नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए ईरान जाएंगी।

 

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