India-UK Free Trade Deal: भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस व्यापार समझौते का असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। समझौते के लागू होने के बाद ब्रिटेन से भारत आने वाले कई उत्पादों की कीमतों में कमी आने की संभावना है। इनमें स्कॉच व्हिस्की, लग्जरी कारें, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल डिवाइस और प्रीमियम फूड प्रोडक्ट्स जैसे सामान शामिल हैं।
क्या है भारत-UK FTA?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA दो देशों के बीच किया जाने वाला ऐसा व्यापारिक समझौता है, जिसके तहत कुछ उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को कम या खत्म किया जाता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलता है और उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, जो अब अमल में आने जा रही है।
स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में आ सकती है कमी
वर्तमान में भारत में स्कॉच व्हिस्की पर ऊंचा आयात शुल्क लगाया जाता है। FTA लागू होने के बाद इस शुल्क में बड़ी कटौती की जाएगी। इसके चलते ब्रिटेन से आयात की जाने वाली कई प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की पहले की तुलना में सस्ती हो सकती हैं। हालांकि अंतिम कीमत राज्य सरकारों के कर और अन्य शुल्कों पर भी निर्भर करेगी।
लग्जरी कार खरीदारों को भी मिल सकती है राहत
ब्रिटेन से आने वाली कई प्रीमियम और लग्जरी कारों पर भी आयात शुल्क कम किए जाने की तैयारी है। शुल्क में कमी का असर इन वाहनों की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इससे देश में हाई-एंड कार सेगमेंट की मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
इन उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर
FTA लागू होने के बाद व्हिस्की और लग्जरी कारों के अलावा ब्यूटी प्रोडक्ट्स, मेडिकल डिवाइस, प्रीमियम चॉकलेट, फूड आइटम, फैशन और लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पादों सहित ब्रिटेन में निर्मित कई अन्य वस्तुएं भी सस्ती हो सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर कीमतों का लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत को भी होगा बड़ा आर्थिक फायदा
यह समझौता केवल ब्रिटेन से आने वाले उत्पादों तक सीमित नहीं है। भारतीय निर्यातकों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है। टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापार गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
क्या 15 जुलाई से ही दिखेगा पूरा असर?
हालांकि समझौता 15 जुलाई से लागू हो जाएगा, लेकिन सभी उत्पादों की कीमतों में तत्काल कमी दिखाई देना जरूरी नहीं है। आयातकों, वितरकों और बाजार व्यवस्था के स्तर पर बदलाव होने में समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में धीरे-धीरे उपभोक्ताओं को इस समझौते का फायदा मिलता नजर आ सकता है।
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