G7 शिखर सम्मेलन के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया और इसके सफल होने की उम्मीद जताई।
ईरान समझौते पर जताया भरोसा
ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान के साथ हुआ समझौता आगे भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ेगा। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत के अगले चरण तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। हालांकि समझौते से जुड़े संभावित आर्थिक पहलुओं पर चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका ईरान में किसी तरह का निवेश करने की योजना नहीं बना रहा है।
बेरूत हमले पर जताई नाराजगी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायल द्वारा बेरूत पर किए गए हमले को लेकर भी अपनी असहमति जाहिर की। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौते पर हस्ताक्षर होने से कुछ घंटे पहले हुआ यह हमला उन्हें पसंद नहीं आया था और उन्होंने अपनी नाराजगी इजरायली पक्ष के सामने भी रखी थी। उन्होंने कहा कि इस घटना के बावजूद उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ हुआ समझौता प्रभावित नहीं होगा और आगे भी कायम रह सकता है।
हिजबुल्लाह को बताया क्षेत्रीय चुनौती
लेबनान की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती ईरान है, लेकिन हिजबुल्लाह जैसी ताकतें भी लगातार अस्थिरता पैदा करती रहती हैं। उन्होंने लेबनान में चल रहे तनाव को एक सीमित संघर्ष करार देते हुए कहा कि ऐसे समूह समय-समय पर सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं।
इजरायल को लेकर दिया बड़ा बयान
इजरायल-अमेरिका संबंधों पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने हमेशा इजरायल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उठाए गए कदमों ने इजरायल को मजबूत समर्थन दिया। ट्रंप ने कहा मेरे बिना इजरायल का अस्तित्व नहीं होता और यह भी जोड़ा कि उनके जैसे कदम उठाने के लिए अन्य राष्ट्रपति तैयार नहीं थे।
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