दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह कमीशन के बदले ऐसे बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने और असली आरोपियों की पहचान छिपाने के लिए किया जाता था।
केरलम की महिला से ठगी के बाद खुला राज
पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार, जांच की शुरुआत केरलम की एक महिला से ऑनलाइन दो लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत के बाद हुई। मामले की पड़ताल के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम एक ऐसे बैंक खाते में भेजी गई थी, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा रहा था। जांच आगे बढ़ी तो NCR में सक्रिय पूरे नेटवर्क का पता चला।
बेरोजगार लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी दिलाने का लालच देता था। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। आरोपियों द्वारा खाते खुलवाने के बाद उनसे जुड़े ATM कार्ड, चेक बुक, मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी अपने कब्जे में ले ली जाती थी।
10 आरोपी हुए गिरफ्तार
मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसमें महिला SI रिंकी, हेड कांस्टेबल कुलदीप, हेड कांस्टेबल पारस और महिला हेड कांस्टेबल पूनम शामिल थीं। तकनीकी निगरानी और सर्विलांस की मदद से टीम ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय कुमार, प्रदीप कुमार, यातेंद्र कुमार, मुकेश, विनेश, गुरबाज सिंह, अमन, सूरज यादव, गौरव नाहर और लक्ष्मण के रूप में हुई है।
बैंकिंग से जुड़े कई मशीनें बरामद हुईं
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 POS मशीनें, 27 चेक बुक, 17 ATM कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया।
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