सलाखों के पीछे उभरा छिपा कलाकार, गाजियाबाद की डासना जेल के कैदी की पेंटिंग ने जीता दिल…
अरुण का कहना है कि जेल में बिताए समय ने उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया। उन्होंने खुद को बदलने और आत्मनिर्भर बनने के लिए जेल में चल रहे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस सफर में जेल प्रशासन और अधिकारियों का सहयोग भी उन्हें लगातार मिलता रहा।
जेल प्रशासन का दावा है कि ऐसे प्रयासों से बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और रिहाई के बाद वे सामान्य जीवन की ओर लौट पा रहे हैं।
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बताया जाता है कि अरुण करीब एक दशक तक जेल में रहे। इस दौरान उन्होंने पेंटिंग के साथ-साथ कई रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। रिहाई के बाद उन्होंने अपनी बनाई एक खास पेंटिंग प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य को भेंट की।