दिल्ली-NCR के पास बसे ग्रेटर नोएडा में आप अपना सपनों का घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने प्रॉपर्टी के सर्कल रेट में 3.58% की बढ़ोतरी को मंज़ूरी दे दी है। करीब नौ साल के लंबे इंतज़ार के बाद हुआ यह बदलाव न सिर्फ़ नए खरीदारों पर असर डालेगा, बल्कि पूरे रियल एस्टेट बाज़ार पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
जेब पर कितना ज़्यादा पड़ेगा बोझ?
सर्कल रेट वह न्यूनतम सरकारी तय कीमत होती है, जिस पर किसी प्रॉपर्टी का आधिकारिक तौर पर रजिस्ट्रेशन किया जाता है। सर्कल रेट में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह है कि अब आपको स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस के तौर पर ज़्यादा पैसे चुकाने होंगे।
जानकारों का कहना है कि स्टील और सीमेंट जैसे कंस्ट्रक्शन मटीरियल पहले से ही महंगे हैं। सर्कल रेट बढ़ने से डेवलपर्स इस अतिरिक्त बोझ को ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे अफ़ोर्डेबल हाउसिंग यानी कि बजट के हिसाब से घर और भी महंगे हो सकते हैं।
टैक्स चोरी पर रोक
जानकारों का मानना है कि बाज़ार की कीमतों और सर्कल रेट के बीच काफ़ी ज़्यादा अंतर था। पहले लोग कम सर्कल रेट का फ़ायदा उठाकर सरकारी रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी की असली कीमत कम दिखाते थे, जिससे वे टैक्स चोरी कर पाते थे। रेट में बढ़ोतरी से अब बाज़ार की कीमतों और सरकारी तय रेट के बीच का अंतर कम हो जाएगा, जिससे प्रॉपर्टी के लेन-देन में ज़्यादा पारदर्शिता आएगी और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की गुंजाइश कम हो जाएगी।
सिर्फ़ 30 मिनट में एक्सप्रेसवे
सिर्फ़ रेट ही नहीं बढ़े हैं अथॉरिटी ने विकास के लिए एक पूरा रोडमैप भी जारी किया है। हाल ही में हुई बोर्ड मीटिंग में ₹6,048 करोड़ के बजट को मंज़ूरी दी गई, जिसका मुख्य आकर्षण 37 किलोमीटर लंबी एक नई सड़क का निर्माण है। यह 105 मीटर चौड़ी, 8-लेन वाली सड़क ग्रेटर नोएडा (सेक्टर अल्फ़ा-2) को सीधे हापुड़ बाईपास और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी।
जब यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा तो ग्रेटर नोएडा से एक्सप्रेसवे तक का सफ़र सिर्फ़ 30 से 45 मिनट में तय किया जा सकेगा। यह नया कॉरिडोर NH-91, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और न्यू नोएडा को भी आपस में जोड़ेगा। हालाँकि, इस प्रोजेक्ट को ज़मीन पर साकार होने में अभी भी 2 से 3 साल और लगेंगे।
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