राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) के प्रमुख मोहन भागवत(Mohan Bhagwat) ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे विषयों पर केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है बल्कि इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और दीर्घकालिक सोच आवश्यक है। उनका मानना है कि किसी भी नीति की सफलता जनता की समझ और सहयोग पर निर्भर करती है।
मैसूरु में ‘राष्ट्रीय विकास में सामाजिक समरसता की भूमिका’ विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में भागवत ने समाज में विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल नारे लगाने से समानता नहीं आती बल्कि लोगों के साथ व्यवहार में बराबरी दिखनी चाहिए।
जातिगत राजनीति पर कही ये बात
जातिगत राजनीति पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि जब तक समाज स्वयं जाति आधारित पहचान को महत्व देता रहेगा, तब तक राजनीतिक दल इसका इस्तेमाल करते रहेंगे। उनके अनुसार कई नेता विकास और कार्यों के बजाय जातीय समीकरणों के आधार पर समर्थन हासिल करने की कोशिश करते हैं।
‘लोगों में जागरूकता पैदा करना सबसे जरूरी’
जनसंख्या नियंत्रण विधेयक और यूसीसी से जुड़े सवालों पर भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस एक सामाजिक संगठन है, सरकार नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को प्रभावी बनाने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना सबसे जरूरी कदम है।
उन्होंने आपातकाल के समय लागू की गई जनसंख्या नियंत्रण नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब किसी नीति को कठोर तरीके से लागू किया जाता है तो समाज में असंतोष और विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए ऐसे मुद्दों पर संवाद, जागरूकता और सामाजिक सहमति बेहद महत्वपूर्ण हैं।