उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सोमनाथ(Somnath Dham) केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, आस्था और अटूट आत्मविश्वास का प्रतीक है। सदियों के इतिहास और कई आक्रमणों का सामना करने के बाद भी सोमनाथ आज दुनिया को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक शक्ति की अमरता का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 8 से 11 मई तक सोमनाथ मंदिर परिसर में आयोजित होने वाला “विरासत वर्ष के 75 वर्ष” समारोह महज धार्मिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव है। उनके अनुसार, यह आयोजन नई पीढ़ी को देश की समृद्ध परंपराओं और सनातन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को मिलेगा संरक्षण
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं पुनरोद्धार का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर जैसे तीर्थ स्थलों का विकास भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा को नई पहचान दे रहा है।
धामी ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं में अपनी संस्कृति, परंपराओं और भारतीय सभ्यता के मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। साथ ही समाज में सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रप्रेम और आध्यात्मिक चेतना को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि सोमनाथ से जुड़ा यह विशेष आयोजन भारत की सनातन विरासत को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाएगा।