बिहार(Bihar) के मुजफ्फरपुर जिले से पुलिस के कामकाज पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। जिस पदार्थ को पुलिस ने कथित तौर पर स्मैक बताते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया था वह बाद में फॉरेंसिक जांच में बुखार की दवा निकला। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया। इस घटना ने जांच प्रक्रिया और प्रारंभिक कार्रवाई की गंभीरता पर नई बहस छेड़ दी है।
यह मामला बेनीबाद थाना क्षेत्र का है। करीब नौ महीने पहले तत्कालीन थाना प्रभारी साकेत कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने पिरौछा गांव के प्रेम सागर, शुभश कुमार और राजेश कुमार को हिरासत में लिया था। पुलिस का दावा था कि प्रेम सागर के पास से 20 पुड़िया और अन्य दो युवकों के पास से पांच-पांच पुड़िया संदिग्ध पदार्थ बरामद हुआ जिसे स्मैक मानते हुए तीनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट ने बदली पूरी तस्वीर
गिरफ्तारी के बाद बरामद पदार्थ को वैज्ञानिक जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया। जांच पूरी होने पर आई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि बरामद सामग्री किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ नहीं थी बल्कि बुखार के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा थी। इसके बाद अदालत ने तीनों युवकों की रिहाई का आदेश जारी कर दिया।
जांच पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की शुरुआती जांच और बरामदगी की जांच-परख पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में किसी भी पदार्थ को मादक घोषित करने से पहले वैज्ञानिक जांच के परिणामों का इंतजार करना बेहद जरूरी होता है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि जांच में छोटी सी चूक भी किसी निर्दोष व्यक्ति के जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है।