इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने TDS से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए नया फॉर्म 141 लागू कर दिया है। अब तक जिन कामों के लिए चार अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे, वे अब केवल इस एक फॉर्म से पूरे हो जाएंगे। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया सरल होगी और टैक्सपेयर्स का समय और मेहनत दोनों बचेगा।
कौन-कौन से फॉर्म होंगे खत्म
फॉर्म 141 लागू होने के बाद ये चार फॉर्म अब उपयोग में नहीं रहेंगे-
फॉर्म 26QB (संपत्ति की खरीद पर TDS), फॉर्म 26QC (किराए के भुगतान पर TDS), फॉर्म 26QD (कॉन्ट्रैक्टर या प्रोफेशनल को भुगतान पर TDS), और फॉर्म 26QE (क्रिप्टो वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांसफर पर TDS)।
फॉर्म 141 के दायरे में क्या आएगा
नए नियमों के अनुसार, फॉर्म 141 का इस्तेमाल 50,000 रुपये प्रति महीने के भुगतान पर TDS और 50 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर TDS जमा करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, हिंदू अविभाजित परिवार और अन्य टैक्सपेयर जो टैक्स ऑडिट के अधीन नहीं हैं, उनके 50 लाख रुपये से अधिक के पेशेवर, कमीशन या कॉन्ट्रैक्ट लेबर भुगतान की रिपोर्ट भी इसी फॉर्म के माध्यम से होगी। क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर किए गए भुगतान भी इसी फॉर्म के अंतर्गत आएंगे।
फॉर्म भरने के लिए जरूरी जानकारी
टैक्सपेयर्स को फॉर्म भरते समय डिटेक्टर और डिटेक्टी दोनों के PAN, एड्रेस, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और लेन-देन की पूरी जानकारी तैयार रखना होगी। फॉर्म 141 ई-फाइलिंग पोर्टल पर PAN के जरिए ई-पे टैक्स सेक्शन में चयनित अनुसूचियों के अंतर्गत भरा जा सकता है। इसके बाद ऑनलाइन भुगतान करके फॉर्म जमा किया जाएगा और चालान-सह-विवरण डाउनलोड किया जा सकेगा।
सबसे बड़ा बदलाव
इस फॉर्म में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब फॉर्म की संख्या खरीदारों के आधार पर तय होगी, न कि अलग-अलग सेलर्स के अनुसार। यानी एक ही फॉर्म में कई सेलर्स की जानकारी एक साथ दी जा सकती है, जिससे प्रक्रिया और भी आसान और तेज हो जाएगी।
फॉर्म 141 के लागू होने से TDS प्रक्रिया सरल, तेज और कम जटिल हो जाएगी। टैक्सपेयर्स अब कम फॉर्म भरेंगे, समय और मेहनत की बचत होगी, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसान भुगतान और रिपोर्टिंग संभव होगी।
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