प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Modi) ने महिला आरक्षण बिल पर अपने विचार रखते हुए इसे देश के लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देना आज के समय की मांग है और इसे लागू करने में किसी भी तरह की देरी करना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, इस पहल से लोकतंत्र अधिक सक्रिय, समावेशी और भागीदारीपूर्ण बनेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लिखा कि 21वीं सदी में भारत एक ऐसे ऐतिहासिक दौर की ओर बढ़ रहा है, जहां समानता और जनभागीदारी जैसे मूल्यों को और सशक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संसद एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने जा रही है, जो लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और व्यापक बनाएगी। इस फैसले से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई मजबूती मिलेगी और उन्हें लोकसभा व विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सकेगा।
विभिन्न त्योहारों का उत्सवपूर्ण माहौल
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह महत्वपूर्ण पहल ऐसे समय में सामने आ रही है, जब देशभर में विभिन्न त्योहारों का उत्सवपूर्ण माहौल है। असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख, केरल में विषु, तमिलनाडु में पुथांडु और उत्तर भारत में बैसाखी जैसे पर्व नई ऊर्जा और आशा का संदेश देते हैं। प्रधानमंत्री ने देश और विदेश में इन त्योहारों को मनाने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की।
संसद में होगी अहम बैठक
इसके अलावा, उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती और डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का जिक्र करते हुए कहा कि ये अवसर हमें सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों की याद दिलाते हैं। इन्हीं प्रेरक पलों के बीच 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा कर उसे पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने इस पहल को केवल एक कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं और अधिकारों का प्रतिबिंब बताया। उनका मानना है कि यह कदम भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी, सशक्त और संतुलित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।