पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, श्री केदारनाथ के अधिकारियों ने वार्षिक तीर्थयात्रा के मौसम के दौरान उत्पन्न होने वाले सूखे कचरे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए ‘कैरी मी बैक’ (Carry Me Back) कचरा प्रबंधन अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उनके द्वारा उत्पन्न कचरे की ज़िम्मेदारी लेने और नाज़ुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह पहल केदारनाथ धाम में कचरा निपटान के लिए ‘कैरी मी बैक’ के रूप में, ज़िलाधिकारी विशाल मिश्रा की देखरेख में शुरू की गई है।
'Carry Me Back' campaign aims to keep Kedarnath free of litter.
The initiative has a simple aim – to encourage visitors to Kedarnath not to leave behind things that could end up as waste.
They will now be expected to deposit such items at designated collection centres in… pic.twitter.com/CfpUeUrIs0
— News Arena India (@NewsArenaIndia) June 3, 2026
‘कैरी मी बैक’ पहल के बारे में
श्री केदारनाथ में “कैरी मी बैक” पहल रुद्रप्रयाग ज़िला प्रशासन द्वारा पर्यावरण संगठन ‘हीलिंग हिमालयाज़ फाउंडेशन’ और ‘सुलभ इंटरनेशनल’ के सहयोग से शुरू की गई थी। श्री केदारनाथ, जो भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, हर साल लाखों आगंतुकों को आकर्षित करता है। जहाँ तीर्थयात्रियों का आगमन स्थानीय पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है, वहीं इससे ट्रेकिंग मार्गों और मंदिर परिसर के आसपास प्लास्टिक की बोतलों, खाने के रैपरों और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का जमाव भी होता है। इस कचरे का प्रबंधन करना अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस पहल के तहत, तीर्थयात्री स्वेच्छा से स्वच्छता अभियान में भाग ले रहे हैं और सूखे कचरे को अपने साथ गौरीकुंड तक ला रहे हैं। यह पहल धाम को कचरा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि हिमालय सुरक्षित रहे और एक पर्यावरण-अनुकूल वातावरण बना रहे। श्रद्धालुओं को केवल श्री केदारनाथ से गौरीकुंड तक कचरा लाना है, इसके बाद की ज़िम्मेदारी ‘स्वजल विभाग’ संभालेगा और फिर ‘सुलभ विभाग’ पर्यावरण-अनुकूल तरीके से कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया को पूरा करेगा।

