Electric Stove: LPG सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच लोग अब खाना पकाने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में इलेक्ट्रिक चूल्हा यानी इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह एक सस्ता और आसान विकल्प है, जो बिजली की मदद से काम करता है।
कैसे काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा?
इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर एक ऐसा उपकरण है जो बिजली की सहायता से कोयले को गर्म करता है। जब कोयला पूरी तरह गर्म हो जाता है, तो वह हीट उत्पन्न करता है, जिससे चाय, सब्जी या अन्य भोजन आसानी से पकाया जा सकता है। खास बात यह है कि इसमें गैस की तरह खुली आग नहीं होती, जिससे इसे इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
1 घंटे में कितनी करता है बिजली खपत
बिजली की खपत मुख्य रूप से चूल्हे की क्षमता (वॉट) पर निर्भर करती है। सामान्यतः 1000 वॉट (1 किलोवॉट) का इलेक्ट्रिक चूल्हा अगर लगातार एक घंटे तक चलता है, तो वह लगभग 1 यूनिट बिजली की खपत करता है। अगर बिजली की दर 8 रुपये प्रति यूनिट है, तो एक घंटे में इसका खर्च करीब 8 रुपये होगा। हालांकि, बड़े बर्नर वाले चूल्हों में खपत इससे अधिक भी हो सकती है।
असल इस्तेमाल में खर्च और भी कम
ध्यान देने वाली बात यह है कि इलेक्ट्रिक चूल्हा आमतौर पर लगातार एक घंटे तक नहीं चलता। ज्यादातर मामलों में 5 से 7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद उसे लगातार बिजली की जरूरत नहीं रहती। ऐसे में वास्तविक बिजली खर्च इससे काफी कम हो जाता है। इसके अलावा, हीट सेटिंग कम करके भी बिजली की बचत की जा सकती है।
कम लागत के साथ कई फायदे
इलेक्ट्रिक चूल्हे का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें इंडक्शन की तरह खास बर्तनों की जरूरत नहीं होती। किसी भी सामान्य बर्तन में खाना बनाया जा सकता है। इसमें खुली आग नहीं निकलती, जिससे यह उपयोग में आसान और सुरक्षित होता है। कोयले का इस्तेमाल होने के बावजूद इसमें ज्यादा धुआं नहीं निकलता और खाना जल्दी तैयार हो जाता है। हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना भी आसान है।
बजट फ्रेंडली और उपयोगी विकल्प
कुल मिलाकर, इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर कम लागत में खाना पकाने का एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो LPG के विकल्प की तलाश में हैं या कम खर्च में खाना बनाना चाहते हैं।
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