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‘No Kings’ आंदोलन ने हिलाया अमेरिका, US से यूरोप तक डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भारी विरोध, सड़कों पर उतरे 90 लाख लोग

No Kings Protest: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला है। शनिवार को ‘No Kings’ यानी ‘कोई राजा नहीं’ अभियान के तहत देश के सभी 50 राज्यों में हजारों रैलियां आयोजित की गईं। आयोजकों के अनुसार, इस बार करीब 90 लाख लोगों के सड़कों पर उतरने का अनुमान है, जो इस आंदोलन को अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बनाता है।

3,100 से ज्यादा कार्यक्रम

इस बार पूरे अमेरिका में 3,100 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो अक्टूबर के मुकाबले करीब 500 ज्यादा हैं। खास बात यह रही कि दो-तिहाई रैलियां बड़े शहरों के बजाय छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में हुईं, जिससे यह साफ हुआ कि विरोध सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है।

मिनेसोटा बना आंदोलन का केंद्र

सेंट पॉल में इस आंदोलन का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसे राष्ट्रीय केंद्र माना गया। यहां मशहूर गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने “Streets of Minneapolis” गीत प्रस्तुत किया, जिसे उन्होंने गोलीबारी में मारे गए दो लोगों की याद में लिखा था। उन्होंने लोगों की एकजुटता को उम्मीद की किरण बताया। इस कार्यक्रम में रॉबर्ट डी नीरो, जोन बाएज, जेन फोंडा और बर्नी सैंडर्स जैसे बड़े नाम भी शामिल हुए।

किन मुद्दों पर फूटा गुस्सा

प्रदर्शनकारियों की नाराजगी कई मुद्दों को लेकर सामने आई। सबसे प्रमुख मुद्दा ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति रही, खासकर ICE एजेंटों की कार्रवाई को लेकर लोगों में डर और गुस्सा देखा गया। इसके अलावा ईरान के खिलाफ चल रही जंग, ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती और आर्थिक असमानता भी विरोध के बड़े कारण बने।

अमेरिका के शहरों में जोरदार प्रदर्शन

Washington, D.C. में Lincoln Memorial के पास सैकड़ों लोगों ने मार्च निकाला। वहीं San Diego में करीब 40,000 लोग सड़कों पर उतरे। New York City में सिविल लिबर्टीज यूनियन की प्रमुख डोना लिबरमैन ने कहा कि डर के माहौल के बावजूद लोग चुप नहीं बैठेंगे।

दुनिया के कई देशों में गूंजा विरोध

यह आंदोलन सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। रोम, लंदन और पेरिस जैसे शहरों में भी हजारों लोग सड़कों पर उतरे। कुछ देशों में इसे “No Tyrants” नाम दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई और युद्ध के खिलाफ भी नारे लगाए।

ट्रंप समर्थकों ने बताया ‘साजिश’

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अबीगेल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को “वामपंथी फंडिंग” का परिणाम बताया और कहा कि इन्हें आम जनता का समर्थन नहीं है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने इन्हें “हेट अमेरिका रैली” करार दिया।

जमीनी हकीकत ने बदली तस्वीर

हालांकि, कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। Topeka और Idaho जैसे इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतरे, जहां पहले ट्रंप को भारी समर्थन मिला था। टीचर्स फेडरेशन की प्रमुख रैंडी वेनगार्टेन ने कहा कि लाखों लोगों की आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

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