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NEET पेपर लीक केस में अब तक 7 गिरफ्तार, जानें स्कैम में किस-किस का नाम शामिल…

NEET पेपर लीक(NEET Paper Leak) मामले में सीबीआई ने अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए आर्थिक लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है। एजेंसी की एक विशेष टीम पूरे मामले में मनी ट्रेल खंगालने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक के जरिए कितनी रकम वसूली गई और यह पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, फिलहाल पांच आरोपियों को सात दिन की कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं दो और लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल सात आरोपी पकड़े जा चुके हैं। जांच एजेंसी बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और नकद लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जुटा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

आरोपियों ने छात्रों को दिलाया था भरोसा 

प्रारंभिक जांच में आरोपियों और छात्रों के बीच करीब 10 लाख रुपये के लेनदेन के संकेत मिले हैं। सूत्रों का दावा है कि आरोपियों ने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि असली परीक्षा के लगभग 150 सवाल उनके दिए गए मॉक पेपर से मेल खाएंगे। इसके बदले एडवांस के तौर पर करीब 30 हजार रुपये ऑनलाइन यूपीआई के जरिए लिए जाने के सबूत भी सामने आए हैं।

जांच में यह भी पता चला है कि पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी सीधे संपर्क और बंद कम्युनिकेशन चैनलों के जरिए छात्रों तक पहुंचते थे। बड़े बैंक ट्रांजेक्शन से बचने के लिए छोटी-छोटी रकम में भुगतान लेने की रणनीति अपनाई गई थी।

अभ्यार्थी जिसे पहले ही थी पेपर लीक की जानकारी 

इस मामले में अब तक जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें नासिक से शुभम खैरनार, जयपुर से मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम से यश यादव, महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से धनंजय लोखंडा और पुणे से मनीषा वाघमारे शामिल हैं।

सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी यश यादव ने कथित तौर पर लीक पेपर जयपुर निवासी दिनेश को उपलब्ध कराया था। बताया जा रहा है कि दिनेश का बेटा जो खुद NEET परीक्षा का अभ्यर्थी था उसे पहले से पेपर लीक की जानकारी थी। आरोप है कि उसने इस जानकारी का इस्तेमाल दूसरे छात्रों को पेपर बेचकर पैसे कमाने के लिए किया।

CBI कर रही जांच

सूत्रों के मुताबिक, संभावित छात्रों तक पहुंचने और रकम इकट्ठा करने के लिए WhatsApp समेत अन्य एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ग्रुप बनाए गए थे। सीबीआई अब डिजिटल सबूत, बैंकिंग रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है। इसके साथ ही एजेंसी वित्तीय जांच में बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की भी मदद ले रही है। हवाला ट्रांजेक्शन के एंगल को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

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