US Attack Iran: ईरान में अमेरिका की ओर से बड़े सैन्य हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। मिसाइल और हवाई हमलों में देश के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया के अनुसार, चाबहार और कोनारक इलाके में 10 जोरदार धमाके हुए, जिनसे कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट हो गया और लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हमलों के बाद ईरान ने एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव किया, लेकिन नुकसान को पूरी तरह रोकना संभव नहीं हो सका।
चाबहार और बंदर अब्बास पर भारी तबाही
ईरानी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास में भी 8 धमाकों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने चुनिंदा सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में खास तौर पर ईरान के कोस्टल रडार, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से मटियामेट कर दिया गया है।
अबू मूसा द्वीप पर धमाके
ईरानी टीवी के अनुसार, दक्षिणी ईरान के अबू मूसा द्वीप में दो भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह द्वीप फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर मौजूद है, जहां से दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से गुजरता है। ईरान इस द्वीप का उपयोग समुद्री निगरानी, सैन्य तैनाती और खाड़ी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने के लिए करता रहा है। ऐसे में यहां हुआ हमला उसके समुद्री रक्षा ढांचे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बुशहर बंदरगाह पर भी तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के अहम बुशहर बंदरगाह को भी निशाना बनाया। यह इलाका फारस की खाड़ी के तट पर मौजूद अहम व्यापारिक और सैन्य ठिकाना है। यहीं ईरान का प्रमुख बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र और नौसेना का बड़ा सैन्य अड्डा भी मौजूद है। इस कारण इस क्षेत्र पर किसी भी सैन्य कार्रवाई को ईरान के रणनीतिक ढांचे पर बड़ा दबाव माना जा रहा है। हालांकि, परमाणु संयंत्र या सैन्य अड्डे को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अमेरिका ने याद दिलाई डील
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा, “हमारी मुख्य डील यह थी कि ‘अगर आप जहाजों पर हमला करना बंद कर देंगे, तो हम अपनी नाकेबंदी हटा लेंगे लेकिन अगर आप जहाजों पर हमला करेंगे, तो हम पलटवार करेंगे और यह पलटवार पहले से कहीं ज़्यादा जबरदस्त होगा। हम यही कर रहे हैं।” उनके बयान से साफ पता चलता है कि समुद्री सुरक्षा और जहाजों पर हमलों को लेकर अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई को जवाबी कदम के तौर पर पेश किया है। वहीं, इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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