UP Census: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया 7 मई से शुरू होने जा रही है। पहले चरण का काम 7 मई से 21 मई तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 22 मई से 20 जून के बीच पूरा किया जाएगा। इस संबंध में मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पूरी जानकारी देंगी।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होने वाली है, क्योंकि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। इसमें मोबाइल डिवाइस के माध्यम से डेटा एकत्र किया जाएगा, जिससे जानकारी अधिक सटीक और विस्तृत होगी। यह कदम नीतिगत निर्णयों को बेहतर बनाने में सहायक माना जा रहा है।
भारत में कब हुई थी जनगणना की शुरुआत?
भारत में जनगणना की शुरुआत 1872 में हुई थी। जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी और आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी। यह प्रक्रिया देश की जनसंख्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नई तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस बार जनगणना में ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS)’ पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जिसके जरिए लगभग रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। इसके अलावा नागरिकों को खुद से ऑनलाइन जानकारी भरने यानी सेल्फ-एनुमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का उपयोग भी इस प्रक्रिया को और सटीक बनाएगा।
जातिगत गणना भी होगी शामिल
सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को हुई बैठक में यह फैसला लिया था कि जनगणना 2027 में जातिगत गणना को भी शामिल किया जाएगा। यह निर्णय देश के सामाजिक ढांचे को बेहतर समझने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जनगणना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य के सभी जिलों में एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी कर्मचारी प्रशिक्षण से अनुपस्थित न रहे, अन्यथा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सेल्फ-एनुमरेशन का ऑप्शन
पहले चरण के दौरान 7 मई से 21 मई तक नागरिकों को ऑनलाइन सेल्फ-एनुमरेशन फॉर्म भरने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए सरकार द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग डिजिटल माध्यम अपनाएं और समय के साथ डेटा की शुद्धता भी सुनिश्चित हो सके।
कब होगा हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का कार्य
मुख्य सचिव S. P. गोयल ने बताया कि हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 के बीच किया जाएगा। इसके तहत घरों की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।
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