बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव(MLC election) और एक सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के बीच जनता दल (यूनाइटेड) ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने कुल चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला किया है जिनमें तीन नाम द्विवार्षिक चुनाव के लिए जबकि एक नाम उपचुनाव के लिए तय किया गया है। जेडीयू की ओर से जारी सूची के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और रणनीतियों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा चर्चा पटना जिले से उम्मीदवार बनाए गए निशांत कुमार को लेकर हो रही है। इसके अलावा मधुबनी से भारती मेहता और पश्चिम चंपारण से शिवानी देवी प्रजापति को पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं शेखपुरा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद को उम्मीदवार घोषित किया गया है। इन नामों के जरिए जेडीयू ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने का संकेत दिया है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि सभी उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
महिला प्रतिनिधित्व पर जेडीयू ने दिया जोर
जेडीयू की सूची की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं को दिया गया प्रतिनिधित्व है। पार्टी ने दो महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने का संदेश दिया है।
मधुबनी से भारती मेहता और पश्चिम चंपारण से शिवानी देवी प्रजापति को उम्मीदवार बनाकर जेडीयू ने यह स्पष्ट किया है कि वह महिलाओं की भूमिका को संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में मजबूत करना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी की दूरदर्शी रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
बीजेपी ने भी घोषित किए अपने उम्मीदवार
विधान परिषद चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने संजय मयूख, पवन सिंह, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है।
NDA के दोनों प्रमुख दलों द्वारा उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है, ताकि विभिन्न वर्गों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाया जा सके।
चुनावी मुकाबले पर टिकी निगाहें
उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही अब सभी दल चुनाव प्रचार और नामांकन की तैयारियों में जुटने लगे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। विभिन्न दल अपने प्रत्याशियों के समर्थन में जनसंपर्क अभियान चलाएंगे और मतदाताओं को साधने की कोशिश करेंगे।
बिहार विधान परिषद चुनाव को राज्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवार जनता का कितना समर्थन हासिल कर पाते हैं और चुनावी नतीजे किस दिशा में जाते हैं।
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