उन्नाव रेप केस में सजा के खिलाफ दायर अंतिम अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के वकील ने दलील दी कि वह घटना के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे। हाईकोर्ट मंगलवार को भी इस मामले में दलीलें सुनना जारी रखेगा।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिविजन बेंच ने सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन के साथ-साथ वकील एसपीएम त्रिपाठी और सिद्धार्थ यादव की दलीलें सुनीं। सीनियर एडवोकेट ने तर्क दिया कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें फैसला 19 दिनों में सुनाया गया था; उन्होंने कहा कि ‘जल्दबाजी में किया गया न्याय, दफन किए गए न्याय जैसा है’। उन्होंने यह भी कहा कि सेंगर को एक ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था, जिसके लिए उन पर आरोप नहीं लगाया गया था। उन पर आईपीसी की धारा 376 (1) और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाया गया था, जबकि उन्हें आईपीसी की धारा 376 (2) के तहत दोषी ठहराया गया, जिसमें एक लोक सेवक के लिए सजा का प्रावधान है।
वकील ने पीड़िता के आरोपों पर उठाए सवाल
सीनियर एडवोकेट हरिहरन ने आगे तर्क दिया कि जिस पीड़िता ने अपीलकर्ता के खिलाफ बलात्कार के आरोप लगाए, उसी पीड़िता ने एक हफ्ते पहले 11 जुलाई, 2017 को उसके बेटे और उसके ड्राइवर के खिलाफ भी बलात्कार के यही आरोप लगाए थे। यह आरोप लगाया गया था कि दोनों घटनाओं में पीड़िता को शशि सिंह ने उकसाया था। सीनियर वकील ने तर्क दिया कि अगर पहली घटना हुई थी, तो क्या यह संभव है कि एक हफ्ते बाद पीड़िता को दूसरी बार उकसाया गया हो।
यह भी दलील दी गई कि एक पंचायत बुलाई गई थी और पीड़िता के परिवार की ओर से अपीलकर्ता के बेटे को शादी का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, अपीलकर्ता इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुआ। इसके बाद, यह मौजूदा मामला दर्ज किया गया। सीनियर एडवोकेट ने यह भी दलील दी कि अपीलकर्ता सेंगर कथित घटना के समय मौजूद नहीं थे।
जानिए क्या है पूरा मामला
सेंगर एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। उसकी अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। पीड़िता की ओर से वकील महमूद प्राचा पेश हुए।
26 मई को यह तर्क दिया गया था कि सेंगर बांगरमऊ से विधायक थे; हालांकि, घटना उत्तर प्रदेश के उन्नाव के माखी पुलिस स्टेशन क्षेत्र की बताई गई। जबकि वह उस क्षेत्र से विधायक नहीं थे। सीनियर वकील ने यह भी तर्क दिया था कि हालांकि सह-आरोपी शशि सिंह को इस मामले से बरी कर दिया गया था, फिर भी सेंगर को आपराधिक साजिश के अपराध के लिए भी दोषी ठहराया गया था। उन्होंने पूछा, “जब इस मामले में सह-आरोपी बरी हो गया तो उन्हें आपराधिक साजिश के अपराध के लिए कैसे दोषी ठहराया जा सकता है?”
सेंगर को 2018 में जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने दोषी ठहराया और सजा सुनाई थी। उसे उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में अन्य लोगों के साथ 10 साल की कैद की सजा भी सुनाई गई थी। दोनों अपीलें दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश पर इस मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित एक अपील का शीघ्र निपटान करने का निर्देश दिया है। (एएनआई)

