UK King Charles III in America: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 अप्रैल 2026 को यूनाइटेड किंगडम के राजा किंग चार्ल्स III के सम्मान में व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर का रखा था। इस दौरान ट्रंप ने ईरान और परमाणु हथियारों को लेकर फिर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु ताकत बनने नहीं देगा। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर किंग चार्ल्स III भी उनकी सोच से पूरी तरह सहमत हैं।
ईरान को लेकर ट्रंप की दो टूक चेतावनी
डिनर के दौरान ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “हमने उस खास दुश्मन को अपनी सेना की ताकत से हरा दिया है और हम उस दुश्मन को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे और इस मामले पर चार्ल्स मुझसे भी ज्यादा सहमत हैं।” इस बयान के जरिए ट्रंप ने अपनी पुरानी दोस्ती को दोहराया और संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के परमाणु को लेकर सख्त नीति पर कायम रहेगा।
ट्रंप ने किया बड़ा दावा
अमेरिकी चैनल CNN के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर यह कहा है कि अमेरिका ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है और ईरान से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं।
अमेरिकी दौरे पर किंग चार्ल्स
किंग चार्ल्स का यह अमेरिकी दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण अमेरिका और ब्रिटेन के बीच कुछ तनाव की स्थिति देखी गई थी। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने साझा रणनीतिक हितों और सहयोग को मजबूत करने का संदेश दिया।
मिडिल ईस्ट पर मिलकर काम कर रहे US और UK
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन मिडिल ईस्ट में मिलकर काम कर रहे हैं और स्थिति को संभालने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देश क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
किंग चार्ल्स ने वैश्विक हालात पर चिंता जताई
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी संसद कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए किंग चार्ल्स III ने भी वैश्विक हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट तक संघर्ष के चलते अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिसका असर दोनों देशों के समाजों पर भी पड़ रहा है। किंग चार्ल्स ने अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास में भले ही दोनों देशों के बीच मतभेद रहे हों, लेकिन आज वे स्वाभाविक रूप से एक जैसी सोच रखते हैं और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर रहे हैं।
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