देश की सर्वोच्च अदालत को सोमवार को पांच नए न्यायाधीश मिल गए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक समारोह में सभी नए जजों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 37 पहुंच गई है, जबकि स्वीकृत पदों की कुल संख्या 38 है। लंबे समय बाद अदालत लगभग अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करती नजर आएगी।
बार और बेंच से आए अनुभवी चेहरे
नए न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना के अलावा चार विभिन्न हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली का नाम शामिल है। इन सभी को हाल ही में कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिली थी।
चर्चा में वेंकिता सुब्रमणि मोहना
इस नियुक्ति प्रक्रिया की सबसे खास बात वेंकिता सुब्रमणि मोहना का सुप्रीम कोर्ट पहुंचना रहा। वह देश की दूसरी महिला हैं, जिन्हें सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया है। इससे पहले यह उपलब्धि जस्टिस इंदु मल्होत्रा को मिली थी। कानूनी क्षेत्र में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाली मोहना की नियुक्ति को न्यायपालिका में महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने बढ़ाई थी जजों की संख्या
हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। ऐसे में नई नियुक्तियों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि राहत ज्यादा दिन नहीं रहने वाली, क्योंकि इसी महीने जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस जे.के. माहेश्वरी सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनके रिटायर होने के बाद शीर्ष अदालत में एक बार फिर रिक्त पदों की संख्या बढ़ जाएगी।
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