CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर सोशल मीडिया पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 19 साल के एक युवक निसर्ग अधिकारी ने दावा किया है कि उसने फरवरी 2026 में सीबीएसई के OSM पोर्टल में सुरक्षा खामियां खोजीं और उसे “हैक” किया था। युवक के मुताबिक, उसने इन कमजोरियों की जानकारी भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को भी दी थी लेकिन अधिकांश मुद्दों को पूरी तरह ठीक नहीं किया गया।
यह दावा ऐसे समय पर सामने आया है जब 12वीं के नतीजों के बाद OSM सिस्टम की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। कई छात्रों और अभिभावकों ने कॉपी स्कैनिंग की गुणवत्ता, धुंधली आंसर शीट्स और मूल्यांकन में खामियों पर चिंता जताई थी।
क्या है CBSE OSM सिस्टम ?
CBSE इस साल करीब 17.7 लाख छात्रों की लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है। इस प्रक्रिया में परीक्षक किसी फिजिकल कॉपी को हाथ से जांचने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लॉग इन करके स्कैन की गई आंसर शीट्स को देख कर अंक प्रदान करते हैं। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और केंद्रीकृत हो जाती है।
युवक के अनुसार क्या मिलीं कमियां
निसर्ग अधिकारी ने दावा किया है कि वह साइबर सिक्योरिटी में रुचि रखने वाला रिसर्चर है और पहले भी बग बाउंटी से जुड़े काम कर चुका है। उसके अनुसार, जब उसने OSM पोर्टल को जांचा तो उसे कई तकनीकी खामियां मिलीं। दावा है कि सिस्टम के कुछ हिस्से सार्वजनिक रूप से एक्सेस किए जा सकते थे जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकता था।
उसमें शामिल थे-
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सिस्टम के कोड में संवेदनशील जानकारी का उजागर होना
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OTP प्रक्रिया में सर्वर-साइड सुरक्षा की कमी
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लॉगिन और एक्सेस कंट्रोल में कमजोरियां
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पासवर्ड बदलने की प्रक्रिया में पर्याप्त वेरिफिकेशन का अभाव
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यूजर एक्सेस नियंत्रण (IDOR) से जुड़ी संभावित खामियां

