राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत(RSS Chief Mohan Bhagwat) रविवार को तीन दिवसीय प्रवास पर लखनऊ पहुंचे। उनका यह दौरा संघ के पूर्वी क्षेत्र के प्रशिक्षण वर्ग में भाग लेने के उद्देश्य से है लेकिन राजनीतिक दृष्टि से भी इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस यात्रा पर राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों ही हलकों की नजर बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, मोहन भागवत अपने प्रवास के दौरान संघ के विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। वह प्रशिक्षण वर्ग में स्वयंसेवकों को वैचारिक मार्गदर्शन देने के साथ-साथ संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े अभियानों की प्रगति पर भी चर्चा करेंगे। संघ द्वारा चलाए जा रहे गृह संपर्क अभियान, शाखा विस्तार और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रमों की स्थिति का भी जायजा लिया जाएगा।
पदाधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित
भागवत निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में ठहरे हुए हैं जहां अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर प्रांत के स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया गया है। इस दौरान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में संगठन को मजबूत बनाने नई शाखाओं के विस्तार और आगामी अभियानों की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, संघ प्रमुख प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक हालात पर भी फीडबैक लेंगे। विशेष रूप से बदलते राजनीतिक समीकरणों और जातीय आधार पर हो रही राजनीति को लेकर संगठन की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। संघ समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और सामाजिक एकता को मजबूत करने पर भी मंथन करेगा।
भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल
इस दौरे के दौरान भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को लेकर भी बातचीत हो सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी संघ प्रमुख से मुलाकात करेंगे। संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकार के कार्यों को लेकर भी चर्चा संभावित है।
राजनीतिक दृष्टि से दौरा है अहम
राजनीतिक दृष्टि से यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संघ और भाजपा दोनों ही स्तरों पर चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों उपमुख्यमंत्री और कुछ वरिष्ठ मंत्री भी मोहन भागवत से मुलाकात कर सकते हैं। इस दौरान सरकार के कामकाज, हालिया मंत्रिमंडल विस्तार और आगामी चुनावी रणनीति पर भी चर्चा संभव है।
संघ प्रमुख का यह दौरा केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि इसे आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बैठकों से संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करने की दिशा तय होती है जिसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।