भारत को वर्ष 2030 तक वैश्विक ड्रोन केंद्र(Drone Hub) बनाने की दिशा में आंध्र प्रदेश अहम भूमिका निभाने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य को लेकर ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के अध्यक्ष स्मित शाह ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू से मुलाकात की। बैठक में राज्य को ड्रोन निर्माण, रिसर्च और इनोवेशन का प्रमुख हब बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के दौरान राज्य के लिए एक विशेष ड्रोन नीति तैयार करने पर विचार किया गया। इसका मकसद निवेश आकर्षित करना, घरेलू स्तर पर ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करना है। सरकार चाहती है कि आंध्र प्रदेश ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े उद्यमों के लिए पसंदीदा गंतव्य बने।
युवाओं को मिलेगा रोजगार
ड्रोन सेक्टर को रोजगार के नए अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किए जाएं, ताकि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में तकनीकी नौकरियां पैदा की जा सकें।
इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग सुविधाओं पर फोकस
राज्य में ड्रोन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए टेस्टिंग सेंटर, रिसर्च लैब और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना पर भी बात हुई। इसके अलावा उद्योगों को सरकारी प्रोत्साहन देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
कई क्षेत्रों में बढ़ेगा ड्रोन का इस्तेमाल
बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि ड्रोन तकनीक को आम लोगों के जीवन से कैसे जोड़ा जाए। इसके तहत कई अहम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई:
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कृषि: फसल निगरानी और कीटनाशक छिड़काव
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कानून व्यवस्था: सुरक्षा एजेंसियों के लिए रीयल-टाइम निगरानी
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स्वास्थ्य सेवा: दवाओं और मेडिकल किट की तेज डिलीवरी
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आपदा प्रबंधन: राहत और बचाव कार्यों में तेजी
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आंध्र प्रदेश क्यों बन सकता है ड्रोन हब?

