रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन दुर्घटनाओं की विभागीय जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी हादसे के बाद जांच का फोकस केवल दोषी कर्मचारी की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता लगाना अनिवार्य होगा। रेलवे बोर्ड का लक्ष्य हादसों के पीछे मौजूद तकनीकी कमियों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना है।
पुरानी व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव
अब तक किसी बड़े ट्रेन हादसे के बाद गठित जांच समितियां मुख्य रूप से यह तय करने पर ध्यान देती थीं कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। जांच के बाद किसी कर्मचारी पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई कर दी जाती थी और प्रक्रिया वहीं खत्म हो जाती थी। रेलवे बोर्ड का मानना है कि केवल जिम्मेदारी तय करने से दुर्घटनाओं को दोबारा होने से रोका नहीं जा सकता। इसलिए जांच के नजरिए में व्यापक बदलाव किया गया है।
अब दुर्घटना के असली वजह की भी होगी जांच
रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया है कि हर गंभीर रेल दुर्घटना में यह पता लगाया जाएगा कि हादसा किन कारणों से हुआ और इसके पीछे सिस्टम की कौन-सी कमजोरियां जिम्मेदार थीं। प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सेफ्टी) उपिंदर सिंह ने सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों (जीएम) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब मुख्य जांच रिपोर्ट के साथ ‘पार्ट-बी’ यानी विस्तार से दुर्घटना अध्ययन एवं विश्लेषण रिपोर्ट भी जरूरी रूप से तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट में तकनीकी और मानवीय दोनों तरह की चूकों का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि सिस्टम में कहां कमी थी और उसे दूर करने के लिए कौन-से तकनीकी सुधार जरूरी है।
Read More
पहली बार भारत के प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 ने भरी उड़ान, अंतरिक्ष में पहुंचे सोने से बने कलाम-साराभाई