Petrol Diesel Price Hike: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारत की तेल कंपनियों पर साफ दिखने लगा है। मौजूदा हालात में सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
जानकारों के अनुसार, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। साल 2026 की शुरुआत में यह कीमत घटकर 70 डॉलर तक आ गई थी, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण फिर से तेजी देखी गई है। इससे आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों की लागत बढ़ गई है।
कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
देश की प्रमुख तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने लंबे समय से ईंधन कीमतों में बदलाव किए बिना बिक्री कर रही हैं। मौजूदा स्थिति में पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार ने दिया ध्यान
तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को देखते हुए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले के बाद कंपनियों का दैनिक नुकसान 2,400 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 1,600 करोड़ रुपये तक आ गया है। हालांकि यह राहत सीमित साबित हो रही है और कंपनियों पर दबाव अभी भी बना हुआ है।
चुनाव के बाद बदल सकते हैं दाम
Macquarie Group की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव समाप्त होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सरकार कीमतों को स्थिर बनाए हुए है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल माना जा रहा है।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगे होने से परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
Read More:

