देशभर में महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। मंगलवार, 19 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी गई। यह बीते एक हफ्ते के अंदर दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इससे पहले पिछले शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल करीब 3 रुपये प्रति लीटर महंगे हुए थे। नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। परिवहन खर्च बढ़ने से आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम
ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये और डीजल 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये और डीजल 96.07 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। दूसरी तरफ चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 104.49 रुपये और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर हो गई है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी ईंधन के दाम तेजी से बढ़े हैं। यहां पेट्रोल 108.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.12 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। फिलहाल वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश के ईंधन बाजार पर पड़ता है। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने रिटेल कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं किया था, जबकि इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं। इसकी वजह से कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
तेल कंपनियों को रोजाना करोड़ों का नुकसान
इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, बढ़ती लागत के कारण सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। पिछले सप्ताह 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह घाटा घटकर करीब 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया था। अब मंगलवार को हुई नई बढ़ोतरी के बाद कंपनियों को कुछ और राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ और बढ़ गया है।
आम जनता पर बढ़ेगा असर
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से सब्जियां, फल, दूध, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने लगती है।

