Pahalgam Terror Attack: 22 अप्रैल 2025 के दिन कितने ही लोग अपने परिवार संग अच्छा और खूबसूरत समय बिताने के लिए पहलगाम की खूबसूरत बैसरन वैली घूमने निकले थे। कोई अपनी शादी के बाद हनीमून मनाने निकला तो कोई अपने बच्चों संग छुट्टियों में खूबसूरत यादें बनाने के लिए घूमने निकला था। लोग वहां घूम ही रहे थे कि, अचानक वहां की खूबसूरती खून से लाल हो गई। उस खौफनाक काले दिन को आज पूरा एक वर्ष बीत चुका है लेकिन इस एक वर्ष में जब भी किसी ने उस दिन के बारे में सोचा उसी की रूह कांप गई। बेरहम आतंकवादियों ने हिन्दुओं को चुन-चुनकर अपनी गोलियों का निशाना बनाया। लोग उनके आगे रोते-बिलखते रहे लेकिन हत्यारों का दिल जरा भी नहीं पसीजा। इस हमले में 26 लोगों ने अपनी जान गवाई। लेकिन आपको बता दें कि, यदि टूरिस्ट गाइड नजाकत अली जैसे लोग वहां मौजूद नहीं होते तो न जानें वहां का नजारा कितना और भयानक हो सकता था।
पहलगाम आतंकी हमले का वो काला दिन
हमले के दौरान टूरिस्ट गाइड नजाकत अली अपने 11 मेहमानों के साथ वहां मौजूद थे। नजाकत अली का कहना है कि, 22 अप्रैल को वे दोपहर करीब 12 बजे अपने समूह के साथ बैसरन पहुंचे थे। उस समय टूरिस्ट जिप लाइन और अन्य एडवेंचर एक्टिविटीज का आनंद ले रहे थे और माहौल पूरी तरह सामान्य और खुशहाल था।
अचानक मातम में बदली खुशियां
नजाकत अली के अनुसार, सब कुछ सामान्य चल रहा था कि अचानक करीब सवा एक से डेढ़ बजे के बीच फायरिंग शुरू हो गई। शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि यह गोलीबारी है। लोग यह सोच रहे थे कि शायद कोई हादसा हुआ है या फिर आपस में कोई झगड़ा हो गया है। लेकिन जब जिप लाइन के पास एक व्यक्ति अचानक गिर पड़ा, तब स्थिति साफ होने लगी कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि आतंकी हमला है। कुछ ही सेकंड में पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और चीख-पुकार गूंजने लगी।
नजाकत अली ने 11 लोगों की बचाई जान
हमले की गंभीरता को समझते ही नजाकत अली ने तुरंत अपने सभी 11 मेहमानों को जमीन पर लेटने के लिए कहा। खतरे को देखते हुए उन्होंने खुद भी उनके साथ जमीन पर लेटकर खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश की। उस समय फायरिंग लगातार जारी थी और हर तरफ दहशत का माहौल था। नजाकत के अनुसार, उस पल में सबसे बड़ी चुनौती अपने मेहमानों को शांत रखना और उन्हें सुरक्षित रखना था।
फायरिंग बढ़ते ही इधर-उधर भागने लगे लोग
जैसे ही फायरिंग एग्जिट पॉइंट की तरफ बढ़ने लगी, स्थिति और भी खतरनाक हो गई। ऐसे में नजाकत ने तुरंत अपने टूरिस्ट्स को लेकर वहां से निकलने का फैसला किया। उन्होंने बिना समय गंवाए सभी को सुरक्षित जगह ले जाना शुरू किया। इसी समय पर हर तरफ जान दांव पर लगी थी, लेकिन जिम्मेदारी ने उन्हें रुकने नहीं दिया।
7 किलोमीटर तक दौड़े नजाकत
नजाकत अली बताते हैं कि उन्होंने अपने 11 मेहमानों को बचाने के लिए लगभग 7 किलोमीटर तक लगातार दौड़ लगाई। रास्ता कठिन था, डर का माहौल था और हर पल खतरा बना हुआ था। इस दौरान जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके दो मेहमान पीछे छूट गए हैं, तो उन्होंने अपनी दौड़ रोककर वापस जाकर उन्हें भी साथ लिया। इसके बाद सभी को सुरक्षित पहलगाम तक पहुंचाया गया, जहां से उन्हें गाड़ियों में बैठाकर रवाना किया गया।
अपने मेहमानों को नजाकत ने पहुंचाया सुरक्षित
जब नजाकत अपने सभी मेहमानों को लेकर पहलगाम पहुंचे, तब सभी बेहद थके हुए, डरे हुए और मानसिक रूप से सदमे में थे। हालांकि राहत की बात यह रही कि उनकी सूझबूझ और हिम्मत से सभी 11 पर्यटक सुरक्षित बच गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय लोगों में भी दहशत का माहौल बन गया।
वो दिन कभी नहीं भूल सकता- नजाकत अली
नजाकत अली आज भी उस दिन को याद करके भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि 22 अप्रैल 2025 की वह तारीख उनके जीवन की सबसे भयावह और अविस्मरणीय तारीख बन गई है। उन्होंने कहा कि वह खुद उस घटना का हिस्सा थे, इसलिए वह इसे कभी नहीं भूल पाएंगे। उनके मुताबिक, उस हमले ने पूरे कश्मीर को हिला कर रख दिया था और हर तरफ दुख और डर का माहौल था।
हमले के बाद घटी टूरिस्टों की संख्या
इस हमले के बाद कई महीनों तक बैसरन और आसपास के इलाकों में पर्यटन पर गंभीर असर पड़ा। पर्यटकों की संख्या काफी कम हो गई, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हुई। नजाकत के अनुसार, तीन से चार महीने तक स्थिति बेहद खराब रही और घोड़े वालों से लेकर छोटे कारोबारियों तक सभी की आमदनी पर असर पड़ा।
घटना की यादें अभी भी लोगों के मन में ताजा
समय के साथ स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई, लेकिन इस घटना की यादें अभी भी लोगों के मन में ताजा हैं। नजाकत अली का कहना है कि अब यहां शांति लौट रही है और पर्यटक फिर से आने लगे हैं। उन्होंने देशभर के लोगों से अपील की कि वे बिना डर के कश्मीर आएं और इसकी प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें। नजाकत अली ने सभी पर्यटकों से अपील की कि वे कश्मीर आएं क्योंकि यह भारत का ताज है। उन्होंने कहा कि यहां की वादियां, पहाड़ और प्राकृतिक सुंदरता दुनिया में अनोखी हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोग मेहमाननवाजी के लिए हमेशा तैयार हैं और हर पर्यटक की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
स्थानीय लोगों से भी की खास अपील
उन्होंने स्थानीय लोगों से भी अपील की कि वे आने वाले पर्यटकों के साथ बढ़िया व्यवहार करें और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखें। नजाकत ने कहा कि मजहब हमें इंसानियत सिखाता है और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कश्मीर में शांति और पर्यटन दोनों लगातार आगे बढ़ते रहेंगे।
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