Online Fraud: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर पेट्रोलिंग के दौरान एक बड़े ऑनलाइन फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, यह संगठित रैकेट बेहद कम कीमत में हूबहू असली जैसे दिखने वाले सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहा था। मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस ने ऐसे किया खुलासा
नियमित साइबर गश्त के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध वेबसाइट की जानकारी मिली। गिरोह तक पहुंचने के लिए एक पुलिस अधिकारी ने फर्जी नाम से वेबसाइट पर अकाउंट बनाया और प्लेटफॉर्म के पेमेंट गेटवे के जरिए अपने डिजिटल वॉलेट में ₹100 का रिचार्ज किया। इसके बाद आधार कार्ड का ऑप्शन चुनकर फोटो और फर्जी जानकारी अपलोड की गई। कुछ ही देर में पोर्टल ने असली जैसा दिखने वाला आधार कार्ड तैयार कर दिया।
₹20 में आधार, ₹15 में वोटर ID
जांच में सामने आया कि यह गिरोह मात्र ₹20 में नकली आधार कार्ड और ₹15 में नकली वोटर आईडी कार्ड तैयार कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों का फॉर्मेट, डिजाइन, क्यूआर (QR) कोड और बारकोड बिल्कुल असली जैसे थे। हालांकि, बारकोड स्कैन करने पर सरकारी डेटाबेस की जगह केवल वही फर्जी जानकारी दिखाई देती थी, जो यूजर ने पोर्टल पर दर्ज की थी।
कई सरकारी दस्तावेज किए जा रहे थे तैयार
प्रारंभिक जांच में पता चला कि इन नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल असली पहचान पत्र, पैन (PAN) कार्ड बनवाने या उन्हें अपडेट कराने के लिए सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट के रूप में किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, यह पोर्टल सिर्फ आधार और वोटर आईडी तक सीमित नहीं था, बल्कि ऑनलाइन भुगतान के बाद नकली निवास प्रमाण पत्र, नकली जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और आधार से जुड़े दूसरे सहायक दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे थे।
कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच
दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में FIR दर्ज कर ली है। चूंकि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था, इसलिए जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसका नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हो सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे रैकेट से जुड़े लोगों और इसके संचालन की जांच कर रही है।
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