उत्तर प्रदेश(UP News) सरकार ने ‘एक जिला, एक व्यंजन’ पहल के तहत राज्य के हर जिले के पारंपरिक और खास व्यंजनों की सूची जारी की है। इस योजना का उद्देश्य स्थानीय खानपान को एक पहचान देना, उसकी बेहतर ब्रांडिंग करना और उसे बाजार तक आसानी से पहुंचाना बताया गया है।
हालांकि इस सूची में कई ऐसे प्रसिद्ध व्यंजन शामिल नहीं किए गए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इनमें लखनऊ के मशहूर टुंडे कबाब, अवधी बिरयानी और निहारी, रामपुर के शाही मटन कोरमा और सीक कबाब तथा बरेली के लोकप्रिय मांसाहारी व्यंजन प्रमुख हैं।
पारंपरिक शाकाहारी और मिठाई व्यंजनों को मिली जगह
जारी सूची में कई जिलों के पारंपरिक शाकाहारी और मिठाई आधारित व्यंजनों को जगह दी गई है। आगरा को पेठा और दालमोठ से जोड़ा गया है जबकि फिरोजाबाद के आलू आधारित व्यंजन और मैनपुरी की सोन पापड़ी व उबले आलू से बने व्यंजन शामिल किए गए हैं। मथुरा को पेड़े के लिए चुना गया है।
इसी तरह अलीगढ़ को डेयरी उत्पादों और कचौड़ी के लिए जाना गया है, हाथरस को हींग आधारित व्यंजनों के लिए और कासगंज को मूंगदाल हलवा तथा सिंघाड़े के आटे से बने स्नैक्स के लिए सूची में रखा गया है।
और कौन-से उत्पाद शामिल ?
अयोध्या की कचौड़ी, पेड़ा और कुल्हड़ दही-जलेबी, सुल्तानपुर के पेड़े व नमकीन, बाराबंकी की चंद्रकला और अमेठी के समोसे तथा गुड़ से बनी मिठाइयों को भी इसमें शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रयागराज के कचौरी, समोसा और रसमलाई, फतेहपुर की बेड़मी पूरी, कौशांबी के गुड़ आधारित उत्पाद और प्रतापगढ़ के आंवला उत्पादों को भी इस पहल का हिस्सा बनाया गया है।