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क्या आप भी मंदिर से लौटते समय बजाते हैं घंटी? भूल से भी न करें ये गलती वरना लेने के पड़ेंगे देने! जान लें जरूरी नियम

Mandir Ki Ghanti Ka Mahatva: जब कोई व्यक्ति भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाता है तो सबसे पहले वह घंटी ही बजाता है। मंदिर में प्रवेश से लेकर आरती तक घंटी बजाने का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी की मधुर ध्वनि मन को शांत करती है और पूजा के माहौल को पवित्र बनाती है। जानिए घंटी बजाने के नियम और इससे जुड़ी मान्यताएं।

मंदिर की घंटी का महत्व

मंदिर में प्रवेश करते समय सबसे पहले भक्तों की नजर मुख्य द्वार पर लगी घंटी या बड़े घंटे पर पड़ती है। अधिकांश लोग मंदिर में प्रवेश करते ही घंटी बजाते हैं और अपने आराध्य का जयकारा लगाते हैं। हिंदू धर्म में केवल मंदिर में प्रवेश के समय ही नहीं, बल्कि पूजा और आरती के दौरान भी घंटी बजाने का खास विधान बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे कई आध्यात्मिक कारण माने जाते हैं।

मंदिर में प्रवेश के समय क्यों बजाई जाती है घंटी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजाने का मतलब अपने आराध्य के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराना होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे देवी-देवताओं का ध्यान भक्त की ओर आकर्षित होता है और उसकी प्रार्थना स्वीकार होने की कामना की जाती है।

घंटी की ध्वनि का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि घंटी बजाने से देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागती है। इसके साथ ही घंटी से निकलने वाली ध्वनि आसपास के पर्यावरण की नकारात्मकता को दूर करने वाली मानी जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इसकी कंपन से मन में शुद्धता, भक्ति और पवित्रता का भाव उत्पन्न होता है, जिससे मन का भटकाव कम होता है और व्यक्ति शांत होकर पूजा कर पाता है।

मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजाने का नियम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी को 2 से 3 बार बजाना सही माना जाता है। घंटी को बहुत तेज या जोर से नहीं बजाना चाहिए, क्योंकि इससे कर्कश ध्वनि निकलती है। मधुर स्वर में घंटी बजाना शुभ माना गया है।

आरती के समय कैसे बजाएं घंटी?

आरती के दौरान घंटी बजाने की कोई निश्चित संख्या निर्धारित नहीं मानी गई है। इस समय घंटी का स्वर मधुर होना चाहिए और उसका तालमेल आरती की लय के साथ होना चाहिए। परंपरा के अनुसार, आरती की शुरुआत से लेकर उसके खत्म होने तक घंटी बजाई जाती है।

मंदिर से बाहर निकलते समय क्या करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब पूजा पूरी हो जाए और श्रद्धालु मंदिर से बाहर निकलें, तब घंटी नहीं बजानी चाहिए। माना जाता है कि मंदिर में प्रवेश के समय घंटी बजाना अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रतीक है, जबकि विदा होते समय घंटी बजाने की परंपरा नहीं है।

दोपहर में घंटी बजाना क्यों माना जाता है वर्जित?

मान्यता है कि दोपहर का समय भगवान के विश्राम का समय होता है। इसी कारण इस दौरान पूजा और घंटी बजाना वर्जित माना गया है। यही वजह है कि कई मंदिरों में दोपहर के समय कुछ समय के लिए पट भी बंद कर दिए जाते हैं।

हर मंदिर में नहीं होती घंटी बजाने की अनुमति

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कुछ मंदिरों के गर्भगृह में सभी श्रद्धालुओं को घंटी बजाने की अनुमति नहीं होती। ऐसे स्थानों पर घंटी बजाने के लिए निर्धारित समय और नियम बनाए जाते हैं, जिनका पालन करना जरुरी माना जाता है।

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Disclaimer: खबर में दी गई बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित हैं। mhone News व्यक्तिगत रूप से इसका समर्थन नहीं करता है और न ही किसी घटना या लाभ-हानि की जिम्मेदारी लेता है।

Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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