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कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार का बड़ा फैसला, 1 अप्रैल से लगेंगे विशेष कैंप

जम्मू-कश्मीर सरकार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की पुश्तैनी संपत्तियों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने घाटी के 10 जिलों में विशेष आउटरीच कैंप लगाने का निर्णय लिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू होंगे। इन कैंपों का उद्देश्य संपत्तियों की पहचान करना, सीमांकन करना और असली मालिकों को उनका अधिकार दिलाना है। यह निर्णय अवैध कब्जों की निगरानी के लिए बनाई गई ओवरसाइट स्टीयरिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। इसके बाद डिविजनल प्रशासन ने सभी जिला आयुक्तों को इन कैंपों के आयोजन के निर्देश जारी किए हैं।

मौके पर सुलझाए जाएंगे विवाद

सरकार के अनुसार इन आउटरीच कैंपों में कई प्रकार की शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इनमें अवैध कब्जों से जुड़े मामले, मजबूरी में बेची गई संपत्तियों यानी ‘डिस्ट्रेस सेल’ के मामलों की जांच, जमीन की सीमाओं से जुड़े विवाद, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार, म्यूटेशन और कब्जे से संबंधित शिकायतों का निपटारा शामिल होगा।

अप्रैल में तय हुआ जिलावार कार्यक्रम

सरकार द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी इन कैंपों की निगरानी करेंगे। अप्रैल महीने के लिए तय कार्यक्रम के अनुसार –

  • श्रीनगर : 1-2 अप्रैल

  • बडगाम : 6-7 अप्रैल

  • गांदरबल : 8-9 अप्रैल

  • बांदीपोरा : 10-11 अप्रैल

  • बारामूला : 15-16 अप्रैल

  • कुपवाड़ा : 17-18 अप्रैल

  • पुलवामा : 20-21 अप्रैल

  • शोपियां : 22-23 अप्रैल

  • अनंतनाग : 24-25 अप्रैल

  • कुलगाम : 27-28 अप्रैल

संगठन ने फैसले का किया स्वागत

विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए काम करने वाले संगठन ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (AIKS) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन के अध्यक्ष रविंदर पंडिता ने कहा कि यह कदम लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान में मददगार साबित हो सकता है।

1990 को कट-ऑफ डेट बनाने की मांग

AIKS ने यह भी सुझाव दिया है कि 1990 को कट-ऑफ तारीख मानते हुए विस्थापित परिवारों की संपत्तियों की एक विस्तृत सूची तैयार की जाए। संगठन का मानना है कि पलायन के बाद राजस्व रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव या हेरफेर हुआ हो सकता है।

स्थानीय सर्वेक्षण कराने का सुझाव

AIKS ने यह भी मांग की है कि जिन विस्थापित परिवारों के पास अपनी पुश्तैनी संपत्तियों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, वहां स्थानीय स्तर पर सर्वेक्षण कर वंशावली के आधार पर उनके अधिकार तय किए जाएं। सरकार की इस पहल को घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की संपत्ति संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Ram Janam Chauhan
Ram Janam Chauhanhttp://mhone.in
राम जनम चौहान वर्तमान में MH One News के साथ जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से पॉलिटिक्स और नेशनल न्यूज़ को कवर करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण संस्थान के साथ की। इसके अलावा Zee Media और India News में इंटर्नशिप की है। राम जनम चौहान ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज (गोकलपुरी, दिल्ली) से पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है।
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