भारत के प्रमुख मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि अपार संपत्ति के कारण आर्थिक रूप से भी काफी समृद्ध माने जाते हैं। विभिन्न आकलनों के मुताबिक, देश के 10 सबसे धनी मंदिरों(India’s 10 richest temples) के पास कुल मिलाकर करीब 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026 के अनुसार, तिरुपति बालाजी मंदिर लगभग 3.38 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे समृद्ध धार्मिक स्थलों में तीसरे स्थान पर है।
कितनी है स्वर्ण मंदिर(हर मंदिर साहिब) की वार्षिक आय ?
वहीं, स्वर्ण मंदिर की वार्षिक आय करीब 1,260 करोड़ रुपये बताई जाती है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के आंकड़ों के आधार पर यह भी कहा जाता है कि तिरुपति मंदिर की कुल संपत्ति कई छोटे देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। यहां रोजाना आम दिनों से लेकर विशेष अवसरों तक 1 से 5 करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर सबसे समृद्ध
केरल स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर को प्राचीन खजाने के लिहाज से सबसे समृद्ध मंदिर माना जाता है। इसकी अधिकतर संपत्ति पुराने खजाने के रूप में सुरक्षित है, जिसमें सोने की मूर्तियां, प्राचीन सिक्के और कीमती रत्न शामिल हैं। इसकी कुल कीमत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जाती है, और इसका प्रबंधन सरकारी निगरानी तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत होता है। पिछले दो वर्षों में मंदिरों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसका मुख्य कारण सोने की कीमतों में तेजी से इजाफा होना है।
अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर
अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी पिछले समय में आय में तेजी आई है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में कुल 376 करोड़ रुपये की आमदनी हुई, यानी औसतन प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला। मंदिर परिसर और आसपास की जमीन मिलाकर करीब 70 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है।
जगन्नाथ मंदिर भी काफी संपन्न
वहीं, पुरी का जगन्नाथ मंदिर जमीन के मामले में भी काफी संपन्न है। इसके पास 60 हजार एकड़ से अधिक भूमि ओडिशा के अधिकांश जिलों में फैली हुई है, जबकि करीब 395 एकड़ जमीन अन्य राज्यों में भी स्थित है।