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तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने से पहले टॉप-5 से बाहर हुआ भारत, IMF रैंकिंग में इस देश से पिछड़ा, लिस्ट में कहां खड़ा है पाकिस्तान?

IMF Rank 2026: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत 2025 में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। 2024 में भारत पांचवें स्थान पर था, लेकिन अब एक पायदान नीचे खिसक गया है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि जारी है, जो इसकी मजबूत बुनियादी स्थिति को दर्शाती है।

किन देशों से पीछे और आगे भारत

नई रैंकिंग में अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है, जिसकी अर्थव्यवस्था लगभग 30.8 ट्रिलियन डॉलर है। इसके बाद चीन (19.6 ट्रिलियन डॉलर) और जर्मनी (4.7 ट्रिलियन डॉलर) का स्थान आता है। ब्रिटेन करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ भारत से आगे निकल गया है, जबकि भारत की जीडीपी 2025 में लगभग 3.92 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है।

2024 से 2025 तक का आर्थिक बदलाव

साल 2024 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 3.76 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 3.92 ट्रिलियन डॉलर हो गई। यानी भारत ने आर्थिक रूप से प्रगति की है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक रैंकिंग में गिरावट दर्ज हुई। यह स्थिति बताती है कि केवल वृद्धि ही नहीं, बल्कि वैश्विक तुलना के तरीके भी अहम भूमिका निभाते हैं।

रैंकिंग गिरने की असली वजह

भारत की रैंकिंग गिरने का मतलब यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है। दरअसल, भारत ने रुपये के आधार पर लगभग 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। लेकिन वैश्विक तुलना डॉलर में होती है, और इस दौरान रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गई। 2024 में एक डॉलर की कीमत करीब 84.6 रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 88.5 रुपये हो गई। इसी कारण भारत की जीडीपी डॉलर में उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाई और रैंकिंग पर असर पड़ा। इसके अलावा जीडीपी के संशोधित आंकड़ों ने भी इस बदलाव में भूमिका निभाई है।

रुपये में मजबूत, डॉलर में दबाव

अगर भारतीय मुद्रा के हिसाब से देखें तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। 2024 में भारत की जीडीपी 318 ट्रिलियन रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 346.5 ट्रिलियन रुपये हो गई। यह वृद्धि दर्शाती है कि घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत हो रही हैं, भले ही वैश्विक आंकड़ों में इसका असर सीमित दिख रहा हो।

आने वाले वर्षों में भारत की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की स्थिति और बेहतर होगी। अनुमान है कि 2026 में भारत छठे स्थान पर बना रह सकता है, लेकिन 2027 तक यह फिर से ब्रिटेन को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच सकता है। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था करीब 4.58 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जबकि ब्रिटेन लगभग 4.47 ट्रिलियन डॉलर पर रह सकता है।

तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह

भारत की तेज आर्थिक रफ्तार को देखते हुए 2028 तक जापान को भी पीछे छोड़ने का अनुमान है। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था करीब 5.06 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि जापान की अर्थव्यवस्था लगभग 4.74 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। इस तरह भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

2030 और उसके बाद की तस्वीर

अनुमान है कि 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था करीब 6.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी और जर्मनी के साथ अंतर काफी कम हो जाएगा। वहीं 2031 तक भारत के करीब 6.79 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान अमेरिका पहले और चीन दूसरे स्थान पर बने रहेंगे।

एशिया में भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति

दक्षिण एशियाई देशों के बीच भारत आर्थिक रूप से सबसे मजबूत स्थिति में बना हुआ है। 2026 के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, भारत की तुलना में उसके पड़ोसी देश काफी पीछे हैं। बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देश आकार और विकास दोनों मामलों में भारत से काफी छोटे आर्थिक दायरे में आते हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का आकार 2026 में लगभग 510.7 बिलियन डॉलर अनुमानित है और वह दुनिया में 37वें स्थान पर है। देश की आर्थिक ताकत का मुख्य आधार उसका कपड़ा उद्योग है, जिससे बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। इसके साथ ही महिलाओं की बढ़ती कार्य भागीदारी ने भी अर्थव्यवस्था को गति दी है। हालांकि इन सकारात्मक पहलुओं के बावजूद बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले काफी छोटी है।

पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 407.79 बिलियन डॉलर आंका गया है और वह वैश्विक रैंकिंग में 45वें स्थान पर है। देश इस समय कई गंभीर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ता विदेशी कर्ज, उच्च महंगाई और कमजोर मुद्रा शामिल हैं। इन्हीं कारणों से उसकी आर्थिक वृद्धि धीमी बनी हुई है और उसे बार-बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है।

नेपाल की क्या है हालत

नेपाल इस सूची में सबसे छोटे आर्थिक आकार वाला देश है। 2026 में उसकी अर्थव्यवस्था लगभग 45.84 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान है और वह 104वें स्थान पर है। नेपाल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन, कृषि और विदेशों में काम कर रहे नागरिकों से आने वाले रेमिटेंस पर आधारित है। धीरे-धीरे विकास होने के बावजूद उसका आर्थिक विस्तार अभी सीमित है।

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत

रुपये की कमजोरी के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। आने वाले समय में भी भारत की जीडीपी 6 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो इसे वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में और मजबूत बनाएगी।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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