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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान से लोनी को मिलेगा नया रूप, 30 मीटर चौड़ी सड़कों से ट्रैफिक को मिलेगी राहत

लोनी इलाके की तस्वीर अब बदलने की तैयारी है। लंबे समय से अव्यवस्थित बसावट, अवैध कॉलोनियों और भारी ट्रैफिक जाम से जूझ रहे इस क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण(Ghaziabad Development Authority) ने एक नया खाका तैयार किया है। इस योजना के तहत एक मिनी पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा जिसका उद्देश्य पूरे इलाके को सुनियोजित ढांचे में विकसित करना है।

अभी तक अनियोजित विस्तार और खराब सड़कों के कारण यहां की स्थिति काफी जटिल बनी हुई है जिससे विकास कार्य भी प्रभावित होते रहे हैं। इसे सुधारने के लिए महायोजना-2031 के अंतर्गत सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। योजना में टीला मोड़ से पाइपलाइन रोड और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाले नए मार्ग विकसित किए जाएंगे ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो और अंदरूनी इलाकों तक पहुंच आसान बन सके।

तीन चरणों में पूरा किया जाएगा प्रोजेक्ट 

यह प्रोजेक्ट तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में टीला मोड़ से भारत सिटी के आगे तक करीब 1400 मीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। दूसरे चरण में पाइपलाइन रोड से लगभग 1270 मीटर की कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी, जबकि तीसरे चरण में 550 मीटर लंबा लिंक मार्ग तैयार होगा। मास्टर प्लान के अनुसार सड़कों की चौड़ाई 30 मीटर तय की गई है, हालांकि शुरुआत 15 मीटर चौड़ी सड़क से की जाएगी ताकि काम तेजी से शुरू हो सके और लोगों को जल्द राहत मिल सके।

क्या है योजना का महत्वपूर्ण पहलू ?

इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण भी है। अभी तक स्पष्ट योजना और बेहतर कनेक्टिविटी के अभाव में अनियमित निर्माण तेजी से फैल रहे थे लेकिन नई सड़कों के बनने के बाद नियमानुसार नक्शा पास कराना आसान होगा जिससे लोगों को वैध तरीके से निर्माण करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा। जमीन मालिकों को मुआवजे के साथ एफएआर जैसे विकल्प देने पर भी विचार किया जा रहा है। अलग-अलग चरणों के लिए करोड़ों रुपये का बजट तय किया गया है ताकि काम बिना रुकावट के आगे बढ़ सके।

पायलट प्रोजेक्ट में कौन-से गांव शामिल ?

इस पायलट प्रोजेक्ट में टीला शहबाजपुर, निस्तौली, नारायण नगर, अफजलपुर, शरीफाबाद और असालतपुर जैसे गांवों को शामिल किया जा सकता है। पहले चरण के लिए करीब 0.65 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी, जिस पर लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। दूसरे और तीसरे चरण के लिए भी अलग-अलग बजट निर्धारित किए गए हैं।

प्राधिकरण का कहना है कि इस पहल का मकसद केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे लोनी क्षेत्र को एक व्यवस्थित और सुगम शहरी ढांचे में बदलना है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में इसे अन्य अव्यवस्थित इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।

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