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सीमा सुरक्षा को मिला बड़ा बूस्ट, BSF को सौंपी गई 121 हेक्टेयर जमीन, चिकन नेक इलाके में जल्द होगी फेंसिंग

पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा(Border Security) को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले ‘चिकन नेक’ इलाके की 121 हेक्टेयर जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दी है। इसके साथ ही राज्य के नौ सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त जमीन भी BSF को हस्तांतरित की गई है जहां सीमा चौकियां और फेंसिंग से जुड़े ढांचे तैयार किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी और अवैध घुसपैठ व तस्करी जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इस कदम को केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण भी माना जा रहा है।

पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

यह निर्णय राज्य सरकार की नई कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया था। बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। सरकार ने तय किया कि सीमावर्ती इलाकों में फेंसिंग और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।

इसी योजना के तहत अब BSF को बड़ी मात्रा में जमीन हस्तांतरित कर दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया को तेज गति से पूरा किया गया ताकि सीमा पर जरूरी निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में इस इलाके में नई चौकियां, निगरानी केंद्र और अन्य सुरक्षा सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने साझा की जानकारी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए इस फैसले की जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि चिकन नेक क्षेत्र के अलावा नौ सीमावर्ती जिलों में भी BSF को अतिरिक्त जमीन दी गई है।

सरकार के मुताबिक, इन इलाकों में आधुनिक बॉर्डर आउटपोस्ट, सड़कें और फेंसिंग से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य सीमा की निगरानी को और प्रभावी बनाना है ताकि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

क्यों अहम है ‘चिकन नेक’ इलाका?

‘चिकन नेक’ भारत के लिए बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। यह संकरा भूभाग देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ता है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस इलाके की भौगोलिक स्थिति इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण बनाती है।
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ करीब 2,217 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है जो देश के किसी भी राज्य की सबसे लंबी सीमा है।

इसमें से अधिकांश हिस्से में फेंसिंग हो चुकी है, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी सुरक्षा ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। सरकार का कहना है कि खुले सीमावर्ती हिस्सों का इस्तेमाल अवैध घुसपैठ, पशु तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत संसाधन और पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराना जरूरी हो गया था।

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