तमिलनाडु के प्रसिद्ध पलानी मुरुगन मंदिर की 1.4 एकड़ भूमि की फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। दिंडीगुल की जिला रजिस्ट्रार ससिकला और पलनी के सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिगंडन को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, पूरे मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच-सीआईडी को सौंप दी गई है।
मंदिर की पार्किंग वाली जमीन की हुई फर्जी बिक्री
जानकारी के अनुसार, पहाड़ी की तलहटी में स्थित यह 1.4 एकड़ जमीन वर्षों से पलनी दंडायुधस्वामी मंदिर प्रशासन द्वारा फ्री पार्किंग के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। दस्तावेजों के मुताबिक, लगभग 100 वर्ष पहले यह भूमि दंडायुधस्वामी मठ के नाम हस्तांतरित की गई थी। आरोप है कि मुरुगदास नामक व्यक्ति ने इस जमीन को अपनी पैतृक संपत्ति बताते हुए फर्जी दावों के आधार पर वेल्लईदुरई और सेतुपति नामक दो व्यक्तियों के नाम बेच दिया और उसकी रजिस्ट्री भी करा दी।
मंदिर प्रशासन ने पहले ही जताई थी आपत्ति
पलानी मुरुगन मंदिर तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के अधीन आता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष ही उन्हें इस जमीन को बेचने की कोशिश की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद जिला रजिस्ट्रार कार्यालय को कई पत्र भेजकर स्पष्ट किया गया था कि संबंधित भूमि मंदिर की संपत्ति है और इसका पंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। मार्च 2026 में भी रजिस्ट्री का प्रयास किया गया था, लेकिन तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार ने भूमि को मंदिर की संपत्ति मानते हुए आवेदन खारिज कर दिया था। बाद में संबंधित पक्ष अदालत पहुंचा और वहां से यह आदेश मिला कि दस्तावेज वैध पाए जाने पर तय समयसीमा में पंजीकरण किया जा सकता है। मंदिर प्रशासन का आरोप है कि अदालत के समक्ष भूमि की वास्तविक स्थिति नहीं बताई गई।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा
निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिगंडन का कहना है कि उन्हें मामले की पूर्व जानकारी नहीं थी और उन्होंने अदालत के आदेश के आधार पर रजिस्ट्री की थी। निलंबन के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया है। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री एस. रमेश ने कहा कि सरकार मंदिर की जमीन वापस लेने के लिए सभी कानूनी उपाय कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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