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Noida में डार्क वेब से चल रहा था ड्रग्स का खेल, STF ने इंटरनेशनल रैकेट के मास्टरमाइंड को दबोचा

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (Noida STF) की नोएडा यूनिट ने एक बड़े ऑनलाइन ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए उसके मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और हॉस्टलों में पढ़ने वाले छात्रों को निशाना बनाकर उन्हें नशे की गिरफ्त में धकेल रहा था। गिरफ्तारी ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके से की गई, जिससे पूरे रैकेट का खुलासा हुआ।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह डार्क वेब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सक्रिय था। आरोपी ने अलग-अलग छिपे हुए ऑनलाइन ग्रुप और कम्युनिटी बनाकर विदेशी और हाई-क्वालिटी ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क तैयार कर रखा था। इन ग्रुप्स के जरिए युवाओं को टारगेट किया जाता था खासकर कॉलेज और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को जो आसानी से इस नेटवर्क का हिस्सा बन जाते थे। शुरुआती बातचीत के बाद ऑर्डर लिए जाते और फिर डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया बेहद गुप्त तरीके से की जाती थी।

मास्टरमाइंड गौरव खन्ना की गिरफ्तारी

STF के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का संचालन गौरव खन्ना नाम का आरोपी कर रहा था, जो गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित एक सोसाइटी में रहता था। अधिकारियों ने उसे इस पूरे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ड्रग्स नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया है। एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्र के अनुसार, लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि कुछ लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर छिपकर विदेशी ड्रग्स की सप्लाई कर रहे हैं।

इसके बाद टीम ने तकनीकी निगरानी और सूचना के आधार पर जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार किया। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है। वर्ष 1999 में बीसीए की पढ़ाई के दौरान वह एक गंभीर हत्या के मामले में शामिल पाया गया था, जिसके चलते उसे जेल भी जाना पड़ा था। इसके अलावा उसके खिलाफ मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे कई मामले भी दर्ज हैं।

इससे पहले एक सदस्य हो चुका गिरफ्तार

यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के एक अन्य सदस्य करण राजीव को इससे पहले मई 2026 में गिरफ्तार किया गया था जिसके पास से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। उसी गिरफ्तारी के बाद मुख्य आरोपी फरार चल रहा था। पूछताछ में गौरव खन्ना ने खुलासा किया कि वह 2019 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स की सप्लाई कर रहा था।

वह थाईलैंड से इम्पोर्टेड गांजा और हिमाचल प्रदेश से चरस मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करता था। यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था जहां ड्रग्स को इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे कंप्यूटर पार्ट्स, पेन ड्राइव और अन्य पैकेट्स में छिपाकर भेजा जाता था ताकि किसी को शक न हो।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के जरिए ग्राहकों से संपर्क

यह गिरोह व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बने सीक्रेट ग्रुप्स के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था। ऑर्डर मिलने के बाद भुगतान यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से लिया जाता था। डिलीवरी के लिए रैपिडो, उबर और पोर्टर जैसी ऐप-आधारित सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे नेटवर्क का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

छात्रों को बनाया जा रहा था निशाना

एसटीएफ के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का सबसे चिंताजनक पहलू यह था कि इसका मुख्य टारगेट युवा छात्र थे। कॉलेज और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को आसानी से इस जाल में फंसाया जा रहा था जिससे उनके भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा था।
फिलहाल STF इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है और मामले की आगे की जांच जारी है।

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