Donald Trump and Benjamin Netanyahu Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई फोन पर बातचीत का खुलासा करते हुए स्वीकार किया है कि उन्होंने उन्हें ‘पागल’ कहा था। ट्रंप ने बताया कि लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर वह बेहद परेशान थे और इसी मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच फोन पर कड़ी बहस हुई थी।
पॉडकास्ट में ट्रंप ने कबूल की बात
बुधवार (3 जून, 2026) को न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ एक पॉडकास्ट में ट्रंप ने इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने कहा, ‘हां… मैंने ऐसा कहा था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं गुस्से में था, लेकिन मैं लेबनान के साथ लगातार चल रही जंग से परेशान हो गया था। एक समय पर मैंने कहा- बीबी, हमें यह सब रोकना होगा। हमें इसे रोकना ही होगा।’ ट्रंप के मुताबिक इसी बातचीत के दौरान उन्होंने नेतन्याहू से कहा था कि तुम पागल हो गए हो।
नेतन्याहू के साथ रिश्तों पर भी दिया बयान
हालांकि ट्रंप ने इस विवाद के बीच नेतन्याहू के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को भी मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई मौकों पर साथ मिलकर अच्छा काम किया है। ट्रंप ने कहा, ‘हमने साथ मिलकर अच्छा काम किया…. मैं बीबी को बहुत पसंद करता हूं।’ इससे पता चलता है कि दोनों नेताओं के बीच मतभेद के बावजूद व्यक्तिगत संबंधों में कोई बड़ी दरार नहीं आई है।
एक्सियोस रिपोर्ट में सामने आई पूरी बात
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान पर लगातार जारी बमबारी को लेकर ट्रंप काफी नाराज थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने नेतन्याहू से कहा, ‘तुम पूरी तरह पागल हो चुके हो। अगर मैं न होता, तो तुम आज जेल में होते। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं। इस समय हर कोई तुमसे नफरत करता है। तुम्हारी इन हरकतों की वजह से आज हर कोई इजरायल से नफरत कर रहा है।’
अपनी बात पर अड़े नेतन्याहू
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की नाराजगी के बाद भी नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लेबनान के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने का संकेत दिया था। इससे दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक मतभेद साफ तौर पर सामने आए थे।
युद्धविराम पर बनी सहमति
हालांकि बाद में स्थिति बदलती दिखाई दी। वॉशिंगटन में अमेरिका की अगुवाई में हुई बातचीत के बाद लेबनान और इजरायल युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं। दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है।
हिजबुल्लाह की भूमिका पर रखी गई शर्त
संयुक्त बयान में साफ किया गया कि युद्धविराम तभी प्रभावी माना जाएगा जब ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह पूरी तरह से हमले और गोलीबारी बंद करेगा। दोनों देशों ने संघर्ष रोकने के लिए इस शर्त को अहम बताया है। ऐसे में अब क्षेत्र में शांति की संभावनाएं काफी हद तक हिजबुल्लाह के अगले कदम पर निर्भर करेंगी।
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