दिल्ली सरकार(Delhi Government) ने ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई नए कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद राजधानी के विभिन्न सरकारी विभागों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से नई गाइडलाइन लागू की गई हैं। इन फैसलों का मकसद सरकारी कामकाज को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
लोक निर्माण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और बाढ़ एवं सिंचाई विभाग ने सप्ताह में एक दिन ‘नो कार डे’ मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन अधिकारी और कर्मचारी निजी कारों का उपयोग नहीं करेंगे और मेट्रो, बस या अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों को प्राथमिकता देंगे। इससे ईंधन की खपत कम होने के साथ-साथ ट्रैफिक और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
विदेश यात्राओं पर रोक
सरकार ने अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है। जिन दौरों के प्रस्ताव पहले से लंबित थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे सरकारी खर्च में कटौती होगी और ईंधन की बचत भी संभव हो सकेगी।
नई नीति के तहत विभागों को सरकारी वाहनों का सीमित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक वाहनों, बसों और मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही सरकारी वाहन बेड़े को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
डीजल की खपत घटाने पर जोर
सरकारी कर्मचारियों को निरीक्षण और फील्ड विजिट के दौरान कार पूलिंग अपनाने की सलाह दी गई है। समूह में यात्रा करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि अनावश्यक ईंधन खर्च को रोका जा सके और यातायात का दबाव कम हो।
सरकार ने डीजल चालित पंपों के उपयोग को कम करने की दिशा में भी पहल की है। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इलेक्ट्रिक पंप और स्थायी पंपिंग स्टेशनों का अधिक उपयोग करें। इससे डीजल की खपत घटेगी और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
EV चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना
अनावश्यक यात्रा को कम करने के लिए ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां संभव हो बैठकें डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाएं ताकि समय और ईंधन दोनों की बचत हो सके।
इसके अलावा राजधानी के सभी सरकारी परिसरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक कर्मचारी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं और दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने में योगदान दें।