नई दिल्ली: भारत द्वारा चिनाब नदी पर तेज़ी से आगे बढ़ाए जा रहे जलविद्युत और जल प्रबंधन परियोजनाओं ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पड़ोसी देश में इन परियोजनाओं को लेकर लगातार बयानबाज़ी और विरोध देखने को मिल रहा है, जबकि भारत स्पष्ट कर चुका है कि वह अपने हिस्से के पानी का पूरी तरह उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
चिनाब नदी पर भारत की बढ़ी गतिविधियां
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। भारत का कहना है कि ये सभी परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों और सिंधु जल संधि के दायरे में हैं।
पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी
भारत की इन योजनाओं से पाकिस्तान में चिंता का माहौल है। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि इन परियोजनाओं का असर उनके हिस्से में आने वाले पानी पर पड़ सकता है। इसी वजह से इस्लामाबाद लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है।
Earlier today, I handed over a letter from the Deputy Prime Minister/Foreign Minister of Pakistan to the President of the United Nations General Assembly.
The letter highlights the grave implications of India’s illegal suspension of the Indus Waters Treaty (IWT) for regional… pic.twitter.com/b4kqdiRIpA
— Asim Iftikhar Ahmad, PR of Pakistan to the UN (@PakistanPR_UN) April 24, 2026
भारत का साफ संदेश
भारत ने दो टूक कहा है कि वह अपने अधिकारों के तहत उपलब्ध जल संसाधनों का पूरा उपयोग करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि चिनाब नदी पर बनने वाली परियोजनाएं न केवल ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देंगी, बल्कि जम्मू-कश्मीर के विकास और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी।
रणनीतिक दृष्टि से भी अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, चिनाब नदी पर भारत की बढ़ती मौजूदगी रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं
भारत की तेज़ी से आगे बढ़ती परियोजनाओं ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर हलचल और तेज़ हो सकती है।

