संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की ओर से अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ में 1 से 7 सितंबर तक सात दिवसीय धरना देने की तैयारी में है। किसानों के बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ चंडीगढ़ पहुंचने की संभावना को देखते हुए चंडीगढ़ और मोहाली प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किए हैं। किसान संगठनों ने भी धरने के दौरान प्रशासन के साथ सहयोग करने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का भरोसा दिया है। मोहाली के डेराबस्सी से किसान सोमवार दोपहर बाद ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए। भारतीय किसान यूनियन लखोवाल के डेराबस्सी हलका प्रधान मनप्रीत सिंह अमलाला की अगुवाई में किसान जत्थे चंडीगढ़ पहुंचे।
अमलाला ने बताया कि चंडीगढ़ के सेक्टर-48 में किसानों के लिए धरने की जगह तय की गई है। सात दिन तक चलने वाले मोर्चे के लिए लंगर समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। डेराबस्सी क्षेत्र से किसान और संगठन के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में धरने में शामिल होंगे।
सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने की तैयारी
भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के जिला प्रधान कृपाल सिंह सियाऊ के मुताबिक मोहाली जिले से सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां किसानों के धरने में शामिल होंगी। किसानों के लिए लंगर, पानी, शौचालय, सफाई और पार्किंग जैसी व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और किसान संगठनों के बीच बैठक हो चुकी है।वहीं किसान संगठनों के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-48 और 49 में धरने के लिए जगह उपलब्ध कराई है। मोहाली प्रशासन की ओर से भी बेस्टेक मॉल तक सड़क की एक साइड और फेज-11 से आने वाले मार्ग की एक साइड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के लिए उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
किन मांगों को लेकर किसान कर रहे मोर्चा?
SKM की प्रमुख मांगों में नदी जल विवाद को रिपेरियन सिद्धांत के आधार पर हल करना और पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 78, 79 और 80 को खत्म करना शामिल है। किसान और खेत मजदूरों का पूर्ण कर्ज माफ करने और अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का विरोध भी किया जा रहा है।
किसान संगठनों की मांग है कि गेहूं और धान के अलावा सभी कृषि उपज के लिए C-2 प्लस 50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए। इसके साथ ही बांध सुरक्षा अधिनियम, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज विधेयक को रद्द करने तथा किसानों और मजदूरों को 10 हजार रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा भत्ता देने की मांग भी उठाई जा रही है।
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