भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मामले में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफ़िज़ सईद को कूटनीतिक रास्तों से कानूनी समन भेजने जा रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय यह समन सीधे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को सौंपेगा। इस कदम का मुख्य मकसद अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह साबित करना है कि आरोपी को भारतीय अदालत के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था।
नए कानून BNSS की धारा 356 से कसेगा शिकंजा
जम्मू की विशेष NIA अदालत द्वारा गैर-ज़मानती वारंट जारी होने के बाद अब अगला कदम उसे भगोड़ा घोषित करना है। ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 356 के तहत भारतीय अदालत को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भगोड़े आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी मामले की सुनवाई, ट्रायल और फैसला सुना सकती है। NIA ने पहलगाम हमले की साजिश में लश्कर और उसके सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के प्रमुख के रूप में उसकी भूमिका को मुख्य आधार बनाया है।
पाकिस्तान की चालाकी और प्रत्यर्पण का अभाव
भारत और पाकिस्तान के मध्य प्रत्यर्पण संधि न होने के कारण कूटनीतिक अड़चनें बनी हुई हैं। 76 वर्षीय सईद को अमेरिका और भारत बहुत पहले वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुके हैं तथा उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी प्रभावी है। पाकिस्तान भले ही यह दावा करता आ रहा हो कि सईद टेरर-फाइनेंसिंग के मामलों में लाहौर में बंद है, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह केवल वैश्विक दबाव से बचाने का एक दिखावा है।
26/11 मुंबई हमलों में भी कसता शिकंजा
केवल पहलगाम ही नहीं, बल्कि 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मामले में भी मुंबई पुलिस ने बड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की है। विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम द्वारा अदालत में सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, हाफ़िज़ सईद और ज़की-उर-रहमान लखवी समेत छह फरार पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ ‘प्रोक्लेमेशन ऑर्डर’ की तामील कराने हेतु गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है।
इंटरपोल के जरिए अंतिम वार की तैयारी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुंबई पुलिस की इस याचिका को स्वीकार करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम और मेजर अब्दुर रहमान पाशा जैसे प्रमुख साजिशकर्ताओं के खिलाफ भी इंटरपोल के जरिए कानूनी आदेश तामील कराए जा रहे हैं। इन कदमों के साथ ही भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पार बैठे आतंकियों पर अब उनकी गैर-मौजूदगी में भी भारतीय कानून का पूरा डंडा चलेगा।
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