कफ सिरप(Cough Syrup) और कुछ ओरल टॉनिक के नशे के रूप में बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए केंद्र सरकार ने दवा बिक्री से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन के तहत अब 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली कुछ ओरल लिक्विड दवाओं को शेड्यूल H1 की श्रेणी में शामिल किया गया है। इस बदलाव का मकसद ऐसी दवाओं की बिक्री पर सख्त निगरानी रखना है।
इस नए प्रावधान के मुताबिक, वे सभी ओरल लिक्विड दवाएं इस नियम के दायरे में आएंगी जिनकी पैकिंग 30 मिलीलीटर से अधिक है और जिनमें इथाइल अल्कोहल की मात्रा 12 प्रतिशत से ज्यादा है। इन दवाओं की बिक्री अब केवल पंजीकृत चिकित्सक के वैलिड प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकेगी।
क्या होंगे नए बदलाव?
शेड्यूल H1 में शामिल होने के बाद मेडिकल स्टोर मालिकों को ऐसी दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। इसके साथ ही दवाओं की पैकेजिंग पर निर्धारित चेतावनी लेबल लगाना भी बेहद जरूरी हो जाएगा। सरकार ने शेड्यूल K में भी संशोधन किया है जिसके बाद इन दवाओं को पहले मिलने वाली छूट अब खत्म हो जाएगी। इससे उत्पादन से लेकर खुदरा बिक्री तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी मजबूत होगी।
कब से लागू होगा नियम?
सरकार ने इस संशोधन का मसौदा पहले सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया था। निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति नहीं मिलने और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया। अधिसूचना के मुताबिक यह नया नियम राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने के छह महीने बाद यानी जनवरी 2027 लागू होगा।
इस दौरान दवा निर्माता कंपनियों और विक्रेताओं को नए नियमों के अनुरूप अपनी पैकेजिंग, लेबलिंग और बिक्री प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करने का समय मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से दवाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा और मरीजों की सुरक्षा के साथ दवा वितरण प्रणाली में अधिक पारदर्शिता आएगी।