RSS के खिलाफ़ जंग का ऐलान करने वाले कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे मुश्किल में हैं। बेंगलुरु की ‘जन प्रतिनिधियों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट’ ने RSS के खिलाफ़ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए उनके खिलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
BNS की धारा 356 के तहत आपराधिक मामला दर्ज
RSS कार्यकर्ता तेजस की एक निजी शिकायत पर सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने दिनेश गुंडूराव के खिलाफ़ आरोप हटा दिए और प्रियांक खड़गे व मोहम्मद नलपाद के खिलाफ़ BNS की धारा 356 के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही, दोनों नेताओं को समन भी जारी किया। तेजस ने आरोप लगाया था कि खड़गे, तत्कालीन मंत्री दिनेश गुंडूराव और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाद ने RSS के खिलाफ़ अपमानजनक बयान दिए थे।
तेजस ने 5 नवंबर, 2025 को स्पेशल कोर्ट में इन तीनों के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी। यह शिकायत तत्कालीन IT&BT मंत्री और मौजूदा गृह मंत्री प्रियांक खड़गे व अन्य के एक पत्र के बाद की गई थी। 4 नवंबर को प्रियांक खड़गे ने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक मैदानों में RSS की गतिविधियों और बैठकें करने पर रोक लगाने की मांग की थी।
खड़गे ने कहा था कि RSS लोगों के मन में नकारात्मकता भरती है और समाज में डरावना माहौल बनाती है। चूँकि RSS की सोच कट्टरपंथी है, इसलिए उनकी गतिविधियों पर रोक लगाई जानी चाहिए। खड़गे ने यह पत्र अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी पोस्ट किया था।
X (सोशल मीडिया) पर खड़गे के पत्र का समर्थन करते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडूराव ने कहा था कि ये लोग मेरे सहयोगी की हत्या की धमकी देते हैं और इनकी सोच तालिबानी है। ये लोग गौरी लंकेश, पानसरे और कलबुर्गी की हत्या में सीधे तौर पर शामिल हैं। ये लोग गोडसे की पूजा करते हैं, जिसने गांधी की हत्या की थी।
शिकायतकर्ता ने स्पेशल कोर्ट से तीनों कांग्रेस नेताओं के खिलाफ़ मानहानि का मामला शुरू करने का अनुरोध किया था। मामले की सुनवाई के बाद, स्पेशल कोर्ट ने दिनेश गुंडूराव के खिलाफ़ आरोप हटा दिए और प्रियांक खड़गे व मोहम्मद नलपाद के खिलाफ़ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
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