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2016 में राहुल, 2025 में मानसी और अब केतन… 900 साल पुराने लोहागढ़ किले की झाड़ियों में दफन हैं कई मौतों के खौफनाक राज! रहस्य जो उड़ा देगा आपके होश

Lohagad Fort: महाराष्ट्र के लोनावला के पास स्थित लोहागढ़ किला इन दिनों कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड को लेकर चर्चा में है। हालांकि, यह ऐतिहासिक किला सिर्फ इसी वजह से ही नहीं, बल्कि अपने 900 साल पुराने इतिहास, मराठा साम्राज्य, शानदार वास्तुकला और कुछ संदिग्ध मौतों के मामलों के लिए भी जाना जाता है।

इतिहास और रहस्य दोनों का गवाह

महाराष्ट्र के लोनावला के पास मौजूद लोहागढ़ किला इन दिनों कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले को लेकर चर्चा में है। लेकिन करीब 900 साल पुराना यह ऐतिहासिक किला अपने भीतर वीरता, युद्ध, राजवंशों के उतार-चढ़ाव, अद्भुत स्थापत्य कला और कई जानी-मानी संदिग्ध मौतों की कहानियां भी समेटे हुए है। यही वजह है कि यह किला इतिहास प्रेमियों और टूरिस्टों का ध्यान खींचता आया है।

समुद्र तल से 1,033 मीटर की ऊंचाई पर बना किला

लोहागढ़ किला महाराष्ट्र के लोनावला के पास समुद्र तल से लगभग 1,033 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। चारों ओर फैली पहाड़ियां, हरियाली और बादलों से घिरा यह किला प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक विरासत का अनोखा संगम माना जाता है। इसकी मजबूत दीवारें आज भी इसकी मजबूती की कहानी बयां करती हैं।

11वीं शताब्दी से जुड़ा गौरवशाली इतिहास

माना जाता है कि लोहागढ़ किले का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। इसके बाद इस पर यादव वंश, बहमनी सल्तनत, निजामशाही, मराठा साम्राज्य और अंत में अंग्रेजों का शासन रहा। कई राजवंशों के शासन का साक्षी रहा यह किला आज भी अपने इतिहास की पहचान बना हुआ है।

शिवाजी महाराज की अहम सैन्य चौकी

छत्रपति शिवाजी महाराज ने लोहागढ़ किले को अपनी अहम सैन्य चौकियों में शामिल किया था। उन्होंने इसकी सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए नए दरवाजे, बुर्ज और दीवारों का निर्माण कराया। इसके अलावा मराठा साम्राज्य के अहम खजाने और युद्ध के हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए भी इस किले का उपयोग किया जाता था। मराठों और मुगलों के बीच हुए कई युद्धों में भी इस किले की रणनीतिक भूमिका अहम रही है। ऊंची पहाड़ी पर मौजूद होने के कारण इस पर कब्जा करना आसान नहीं था और इसे पश्चिमी भारत के सबसे सुरक्षित किलों में गिना जाता था।

नाना फड़नवीस और अंग्रेजों के दौर की कहानी

पेशवा शासन के दौरान नाना फड़नवीस ने लोहागढ़ किले का विकास कराया। उन्होंने यहां महल, मंदिर, दरबार और पानी जोड़ने के लिए कई जल संरचनाएं बनवाईं। बाद में साल 1818 में अंग्रेजों ने इस किले पर कब्जा कर लिया। इसके बाद इसका इस्तेमाल कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद रखने के लिए किया गया। कई ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, यहां कई बंदियों को कठोर यातनाएं दी गईं और कुछ स्वतंत्रता सेनानियों की मौत भी इसी किले में हुई।

चार ऐतिहासिक दरवाजे और ‘विंचू काटा’ की खास पहचान

लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए गणेश द्वार, नारायण द्वार, हनुमान द्वार और महा द्वार से होकर गुजरना पड़ता है। मजबूत पत्थरों से बने ये चारों दरवाजे उस समय की बेहतरीन स्थापत्य कला का सबूत पेश करते हैं। वहीं किले का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा ‘विंचू काटा’ है। इसकी आकृति बिच्छू की पूंछ जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया। यहां से आसपास की घाटियां, पहाड़ और हरियाली का मनमोहक नजारा दिखाई देता है, जिसके कारण सबसे अधिक टूरिस्ट इसी जगह पर पहुंचते हैं।

ऐतिहासिक धरोहर और विसापुर किले से जुड़ाव

किले के भीतर लक्ष्मी कोठी, गणेश दरवाजा, नाना फड़नवीस से जुड़ी ऐतिहासिक संरचनाएं और कई पुराने अवशेष आज भी सुरक्षित हैं। ये उस दौर की कला, स्थापत्य और प्रशासनिक व्यवस्था की झलक दिखाते हैं। लोहागढ़ किला एक संकरी पहाड़ी रिज के जरिए पास मौजूद विसापुर किले से भी जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि पुराने समय में दोनों किले मिलकर पूरे इलाके की सुरक्षा करते थे और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद भी करते थे।

मानसून ट्रेक और आसपास के पर्यटन स्थल

लोहागढ़ किला महाराष्ट्र के सबसे जाने-माने ट्रेकिंग डेस्टिनेशन में शामिल है। मालवली और भाजे गांव से शुरू होने वाला ट्रेक आसान होने के कारण बड़ी संख्या में नए ट्रेकर्स भी यहां पहुंचते हैं। खासकर मानसून में हरियाली, झरने, बादल और ठंडी हवा इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। यहां आने वाले पर्यटक विसापुर किला, भाजा गुफाएं, कार्ला गुफाएं, पावना झील और राजमाची प्वाइंट का भी आनंद लेते हैं।

यहां हो चुकी हैं कई संदिग्ध मौतें

लोहागढ़ किला सिर्फ अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ फेमस संदिग्ध मौतों की घटनाओं के कारण भी सुर्खियों में रहा है। दिसंबर 2016 में 21 वर्षीय राहुल नराले का शव किले के पास झाड़ियों में मिला था। वहीं मार्च 2025 में 21 वर्षीय मानसी गोविंदपुरकर का शव भी इसी इलाके में मिला, जिसकी हत्या के मामले में उसके तीन परिचितों पर संदेह जताया गया था। अब कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद यह ऐतिहासिक किला एक बार फिर सुर्खियों में बना हुआ है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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