कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद भारतीय जनता पार्टी में हलचल तेज हो गई है। भजापा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया है। 23 जून को कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात कर इस मामले पर रिपोर्ट सौंपेंगे।
NDA को लगा बड़ा झटका
विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को दो सीटें मिलीं। जनता दल (सेक्युलर) का उम्मीदवार हार गया। मतगणना के दौरान कांग्रेस को 151 वोट मिले, जो उसके अनुमानित समर्थन से अधिक थे। इसके बाद विपक्षी खेमे में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई।
क्रॉस वोटिंग के आरोपों से बढ़ी चिंता
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और जेडीएस के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। भाजपा के दो निष्कासित विधायकों के अलावा कुछ अन्य विधायकों के वोट भी कांग्रेस के पक्ष में जाने की चर्चा है। वहीं जेडीएस के कुछ विधायकों के मतदान को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
एक वोट अमान्य होने से भी बदला समीकरण
मतगणना में भाजपा के एक विधायक का वोट अमान्य घोषित कर दिया गया। अंतिम परिणामों में कांग्रेस के थिप्पन्नाप्पा कामकनूर, पी.वी. मोहन, बी.के. हरिप्रसाद, शिवन्ना बी.एस. और विनय कार्तिक प्रकाश विजयी घोषित हुए। भाजपा के लिंगराज पाटिल और रघु आर ने जीत हासिल की, जबकि जेडीएस उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का सामना करना पड़ा।
BJP ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
कर्नाटक भाजपा ने इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। पार्टी की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा है कि कुछ विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसकी विस्तृत जांच की जाएगी।
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