गाजियाबाद(Ghaziabad) में प्रशासन की सख्त कार्रवाई का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लंबे समय से अपनी संपत्ति वापस पाने की उम्मीद लगाए बैठे एक बुजुर्ग दंपति को राहत दी है। गांधीनगर इलाके में एक दुकान जिस पर करीब 25 साल से कब्जे का विवाद चल रहा था आखिरकार प्रशासन ने खाली कराकर उसके वास्तविक मालिकों को सौंप दी।
कई वर्षों से अपनी ही संपत्ति के लिए संघर्ष कर रहे दंपति के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था। दुकान वापस मिलने के बाद उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी।
शिकायत पर प्रशासन ने शुरू की पड़ताल
बताया जा रहा है कि गांधीनगर निवासी बुजुर्ग दंपति ने अपनी दुकान पर हुए कथित अवैध कब्जे को लेकर जिलाधिकारी के पास शिकायत की थी। दंपति का आरोप था कि उनकी संपत्ति पर लंबे समय से मोहम्मद इमामुद्दीन मलिक नाम के व्यक्ति का कब्जा था। उनका कहना था कि दुकान खाली कराने के प्रयासों के दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शिकायत की जांच शुरू कराई। अधिकारियों ने जमीन और दुकान से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच की। इसके बाद जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करने का फैसला लिया।
अधिकारियों की मौजूदगी में हटाया गया कब्जा
कार्रवाई के तहत मंगलवार को गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार प्रशासनिक टीम और पुलिस बल के साथ गांधीनगर पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में दुकान को कब्जे से मुक्त कराया गया और उसे उसके असली मालिकों को सौंप दिया गया।
दुकान वापस मिलने के बाद परिवार ने पूजा-पाठ कर नई शुरुआत की। लंबे इंतजार के बाद अपना हक वापस मिलने की खुशी में बुजुर्ग दंपति भावुक हो गए। उनके लिए यह सिर्फ दुकान वापस मिलने का नहीं बल्कि वर्षों की परेशानी खत्म होने का मौका था।
भावुक दंपति ने डीएम को बताया ‘हनुमान’
दुकान मिलने के बाद बुजुर्ग दंपति ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार का आभार जताया। भावुक होकर उन्होंने कहा कि जिस तरह संकट के समय भगवान हनुमान मदद के लिए आगे आते हैं उसी तरह प्रशासन ने भी उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया।
दंपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद एक समय ऐसा लगने लगा था कि शायद उन्हें अपनी संपत्ति वापस नहीं मिल पाएगी लेकिन प्रशासनिक पहल से उन्हें न्याय मिल सका।