PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सैन्य दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों प्रदर्शनकारी एकजुट हुए और पाकिस्तान सरकार तथा सेना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की मांग की।
पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगे तीखे नारे
प्रदर्शन के दौरान ‘पाकिस्तानी आर्मी गो बैक’, ‘हम छीन कर लेंगे आजादी’, ‘ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है’ और ‘तेरा बाप भी देगा आजादी’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है और लोगों की आवाज को कुचलने की कोशिश की जा रही है।
नागरिकों की हत्याओं और गिरफ्तारियों का आरोप
प्रदर्शन में शामिल लोगों का दावा था कि PoK में नागरिकों की हत्याएं हो रही हैं और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार क्षेत्र में आम नागरिकों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है।
ब्रिटेन के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन
लंदन के अलावा ब्रिटेन के कई अन्य प्रमुख शहरों में स्थित पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के बाहर भी इसी तरह के प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने वैश्विक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK की स्थिति का संज्ञान लेने और मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
JAAC पर कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव
हाल के दिनों में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने और उसके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इसी वजह से ब्रिटेन में बसे कश्मीरी मूल के लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे PoK के लोगों के अधिकारों और स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व की मांगों का समर्थन करते हैं।
बातचीत के बजाय बल प्रयोग का आरोप
प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप था कि क्षेत्र में बढ़ते असंतोष को संवाद और राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से हल करने के बजाय सुरक्षा बलों के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर लेकर पाकिस्तान सरकार की नीतियों का विरोध किया और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग दोहराई।
आरक्षित सीटों का फैसला बना विवाद की वजह
PoK में मौजूदा आंदोलन की प्रमुख वजह विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया फैसला माना जा रहा है। 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो कश्मीर से जुड़े होने का दावा करते हैं, लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इससे स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और बाहरी प्रभाव बढ़ेगा।
स्थानीय अधिकारों की मांग पर अड़ा संगठन
JAAC का कहना है कि क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों पर अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों का होना चाहिए। संगठन लंबे समय से इसी मांग को लेकर आंदोलन चला रहा है और स्थानीय आबादी की राजनीतिक भागीदारी को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहा है।
महंगाई और बिजली संकट भी बड़े मुद्दे
राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अलावा JAAC ने महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, खराब प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्र की राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। पिछले दो वर्षों के दौरान संगठन ने आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कई बड़े आंदोलन किए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई बार सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई थीं।
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